प्रियंका गाँधी की रैली में सिद्धू ने बोलने से क्यों कर दिया इंकार, जानिये वजह

प्रियंका गाँधी की रैली में सिद्धू ने बोलने से क्यों कर दिया इंकार, जानिये वजह

अमृतसर, पंजाब में कांग्रेस सत्ता में वापसी के संकट से जूझ रही है तो पार्टी के अंदरखाने चुनावी प्रचार में खुलकर रार देखने को मिल रही है। एक दिन पहले रविवार को प्रियंका गांधी की धुरी की रैली से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू क्यों नहीं बोले? उन्हें मंच पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया। अक्सर अपने आक्रामक तेवर और विपक्ष पर तंज कसने वाले सिद्धू को हर कोई सुनना चाहता है। भीड़ उनकी बेबाक बयानबाजी खूब चटकारे लेकर सुनती है। जब तक कांग्रेस ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की, तब तक सिद्धू खूब बोलते थे। उन्हें जहां मौका मिलता था, वह विपक्ष खासतौर पर अकाली दल पर जोरदार हमला बोलने से नहीं चूकते थे। लेकिन, धुरी में उन्होंने बोलने से ही इंकार कर दिया। मंच पर बैठे चरणजीत सिंह चन्नी की ओर इशारा करके कहा- इन्हें बुलवाया जाए।

आखिर सिद्धू क्यों अचानक मौन हो रहे हैं? माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी की धुरी की रैली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और चरणजीत सिंह चन्नी के बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे। सिद्धू को इसके मुकाबले पोस्टर मे ज्यादा तवज्जो नहीं मिली, इससे वह फिर आहत हो गए। क्योंकि प्रदेशाध्यक्ष को चुनावी रैली में तवज्जो ना मिले, इसे वह बर्दाश्त नहीं कर सकते। वैसे, जब से चन्नी को सीएम चेहरा बनाया गया है, कांग्रेस में एक तरह से सिद्धू की उपेक्षा हो रही है। वह बदले हालात में खुद को एडजेस्ट नहीं कर पा रहे हैं।

सर्वेसर्वा की बनी थी इमेज, अचानक झटका लगने से बिखरे सिद्धू
कहा जा रहा है कि यही वजह है कि वह अब बोलने से बच रहे हैं। कांग्रेस में सिद्धू बड़ी तेजी से चल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि पार्टी अब उनकी हर बात मानेगी। उन्होंने अपनी छवि भी इस तरह की बना ली थी कि प्रदेश में वह सर्वेसर्वा हैं। लेकिन जब उन्हें सीएम फेस नहीं बनाया गया तो इससे उन्हें खासा झटका लगा है। जानकारों का यह भी कहना है कि चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम चेहरा बनाने को सिद्धू बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और उन्होंने खुद को अपनी अमृतसर ईस्ट सीट तक सीमित कर लिया है।

हालात भांपकर इसलिए चुप्पी साधे हैं सिद्धू
सिद्धू अब पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी ज्यादा नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे प्रदेश अध्यक्ष की सोच है कि यदि पार्टी जीत जाती है तो श्रेय चरणजीत सिंह चन्नी को जाएगा। यदि कांग्रेस हार जाती है तो उन्हें मौका मिल जाएगा पार्टी आलाकमान को गलत साबित करने का। इसलिए भी वह हालात भांप कर अब चुप हो रहे हैं। ये भी माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रधान अब विवादों से बचना चाह रहे हैं। क्योंकि उनके सलाहकारों ने सलाह दी कि वह बोलते हैं तो इससे पार्टी का तो फायदा होता है, लेकिन सिद्धू को नुकसान होता है। इसलिए भी अब वह बोलने से परहेज कर रहे हैं।

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