चुनाव से पहले WB के राज्यपाल का इस्तीफा क्यों बना बड़ा मुद्दा? ममता के ‘दिल्ली दबाव’ वाले बयान के पीछे क्या है कहानी

चुनाव से पहले WB के राज्यपाल का इस्तीफा क्यों बना बड़ा मुद्दा? ममता के ‘दिल्ली दबाव’ वाले बयान के पीछे क्या है कहानी

द फ्रंट डेस्क: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। गुरुवार शाम आए इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने बोस के इस्तीफे के तुरंत बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त कर दिया है। इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हैरानी जताई है और कहा है कि राज्यपाल को बदलने जैसे महत्वपूर्ण फैसले से पहले राज्य सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई। ऐसे समय में जब राज्य में कुछ ही दिनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इस बदलाव ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

चुनाव से पहले अचानक इस्तीफा

गुरुवार शाम राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया। दिल्ली से समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने पद छोड़ने का फैसला कर लिया है और करीब साढ़े तीन साल तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में काम किया है। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह बताने से इनकार कर दिया। उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल का अचानक पद छोड़ना राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे समय में राज्यपाल की भूमिका भी अहम मानी जाती है।

कार्यकाल खत्म होने से पहले छोड़ा पद

सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था, लेकिन उन्होंने तय समय से करीब 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्होंने अचानक यह फैसला क्यों लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले राज्यपाल का इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है, जिसने राज्य की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में इससे पहले भी राज्यपालों के कार्यकाल को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। बोस से पहले जगदीप धनखड़ भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही राज्यपाल पद छोड़ चुके थे, जब उन्हें एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था।

ममता बनर्जी ने उठाए राजनीतिक दबाव के सवाल

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से जानकारी दी गई कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि अब पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल होंगे। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए राज्यपाल पर दबाव डाला गया हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें इस फैसले पर हैरानी नहीं है और यह संभव है कि चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक दबाव बनाया गया हो। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल को बदलने जैसे फैसलों में राज्य सरकार से सलाह लेना एक स्थापित परंपरा रही है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

चुनावी माहौल में बढ़ा सियासी टकराव

पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इस बार भी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही हैं, जबकि बीजेपी राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे समय में राज्यपाल का इस्तीफा और नए राज्यपाल की नियुक्ति चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक कदम बता रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार की ओर से इस फैसले को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी प्रचार में भी उठाया जा सकता है।

बीजेपी ने खारिज किए आरोप

बीजेपी ने ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस की तबीयत ठीक नहीं थी और संभवतः स्वास्थ्य कारणों की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राज्यपाल का इस्तीफा एक व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है और इसे चुनाव से जोड़कर देखना उचित नहीं है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और चुनाव से पहले यह मामला एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

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