Russia Ukraine War : सुरक्षा परिषद में भारत ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोट क्‍यों नहीं किया? जानिए क्‍या है इसकी तीन बड़ी वजह

Russia Ukraine War : सुरक्षा परिषद में भारत ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोट क्‍यों नहीं किया? जानिए क्‍या है इसकी तीन बड़ी वजह

नई दिल्‍ली,  Russia Ukraine War and UNSC : यूक्रेन पर रूसी हमले का आज तीसरा दिन है। रूस की सेना ने यूक्रेन के कई जगहों और सैन्‍य ठिकानों पर हमला किया है। कई सैन्‍य ठिकानों को तबाह कर दिया है। उधर, दोनों देशों के बीच युद्ध विराम के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर हमले के निंदा प्रस्ताव पर रूस ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। बता दें कि रूस सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। खास बात यह है कि भारत, चीन और यूएई ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। सवाल यह है कि रूस और यूक्रेन पर भारत ने मतदान में हिस्‍सा क्‍यों नहीं लिया? इसके पीछे बड़ी वजह क्‍या है?

  • आजादी के बाद भारत की विदेश नीति सदैव से गुटनिरपेक्ष सिद्धांतों पर टिकी रही है। यह शीत युद्ध का दौर था। उन्‍होंने कहा कि दुनिया में शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भी भारत इस नीति पर कायम है। यानी वह किसी सैन्‍य गुट का हिस्‍सा नहीं है। भारत के अमेरिका से बेहतर संबंध है, तो रूस से उसकी पुरानी दोस्‍ती है। भारत के इजरायल से मधुर संबंध है तो कई खाड़ी देशों से भी उसकी निकटता है। इसकी बड़ी वजह यह रही कि भारत किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप पर यकीन नहीं करता है न ही अपने आंतरिक मामलों में दुनिया के किसी देश का हस्‍तक्षेप स्‍वीकार करता है। भारतीय विदेश नीत‍ि की आस्‍था दुनिया में किसी भी समस्‍या का समाधान संवाद के जरिए ही हो सकता है। यही कारण है कि सुरक्षा परिषद में उसने मतदान देने के बजाए अपना स्‍पष्‍ट मत रखा।

 

        • भारत की कथनी और करनी में फर्क नहीं है। q भारत चीन के साथ सीमा विवाद की समस्‍या का संवाद के जरिए समाधान खोज रहा है। इसके लिए भारत चीन की 14 चरण की वार्ता हो चुकी है। भारत पड़ोसी देश पाकिस्‍तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद का कई वर्षों से संवाद के जरिए ही समाधान करने की बात करता रहा है। हालांकि, पाकिस्‍तान की कथनी और करनी में फर्क होने के कारण अब तक इसका कोई समाधान नहीं निकल सका है। प्रो पंत ने कहा कि वह किसी भी देश के विवाद को युद्ध या जंग के जरिए नहीं वार्ता के जरिए समाधान में यकीन करता है।

भारत ने कहा कूटनीति के जरिए हो समस्‍या का समाधान

संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि हमें इस बात का अफसोस है कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया है। हमें उस पर लौटना होगा। इन सभी वजहों से भारत ने इस प्रस्ताव पर परहेज करने का विकल्प चुना है। भारत ने कहा कि यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत ज्यादा परेशान हैं। हिंसा और दुश्मनी को जल्द खत्म करने की सभी कोशिशें की जाएं। इंसानी जान की कीमत पर कोई भी हल नहीं निकाला जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी फिक्र, भारतीयों की सुरक्षा है। तिरुमूर्ति ने कहा कि हम यूक्रेन में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर काफी ज्यादा चिंतित हैं, जिनमें सैकड़ों भारतीय छात्र भी हैं।

सुरक्षा परिषद में चीन का क्‍या रहा रोल

सुरक्षा परिषद में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ब्राजील, मैक्सिको, केन्‍या, घाना, अल्‍बानिया, नार्वे और आयरलैंड ने पक्ष में मत दिए है। रूस ने विपक्ष में मतदान किया है। भारत, चीन और यूएई ने इसमें हिस्‍सा नहीं लिया। अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। सुरक्षा परिषद में ब्रिटिश प्रतिनिधि ने रूसी सेनाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्‍होंने कहा कि रूसी टैंक आम नागरिकों को कुचल रहे हैं। चीन ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया। चीन के स्थायी प्रतिनिधि झांग जून ने कहा कि हम मानते हैं कि सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। एक देश की सुरक्षा दूसरे देशों की सुरक्षा को कम करके आंकने की कीमत पर नहीं की जा सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Popular

More like this
Related