पंजाब की राजनीति में यह सवाल अक्सर उठता है कि अब तक का सबसे अच्छा मुख्यमंत्री कौन रहा है। लेकिन इसका उत्तर किसी एक नाम तक सीमित नहीं है। अलग-अलग दौर में राज्य की चुनौतियाँ अलग रहीं। कभी कृषि और औद्योगिक विकास प्राथमिकता रहा, कभी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना, तो कभी सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधार चर्चा में रहे। इसलिए इस प्रश्न का जवाब समझने के लिए हमें प्रमुख मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल और उनके प्रभाव का संतुलित विश्लेषण करना होगा।
आधुनिक पंजाब की नींव: प्रताप सिंह कायरों
प्रताप सिंह कायरों को आधुनिक पंजाब की आर्थिक और प्रशासनिक नींव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। उनके कार्यकाल (1956–1964) में सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार हुआ और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिली। औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया गया और शिक्षा संस्थानों की स्थापना पर ध्यान दिया गया। हरित क्रांति से पहले जो बुनियादी ढांचा तैयार हुआ, उसमें उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। हालांकि उनके शासनकाल में राजनीतिक केंद्रीकरण और कुछ विवाद भी रहे, लेकिन दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से उन्हें प्रभावशाली मुख्यमंत्री माना जाता है।

लंबे कार्यकाल और ग्रामीण फोकस: प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल कई बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे और लंबे समय तक राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे। उनके शासनकाल में ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। समर्थकों का मानना है कि उन्होंने राज्य को स्थिर नेतृत्व दिया और ग्रामीण वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी। दूसरी ओर, आलोचक परिवारवाद और वित्तीय अनुशासन को लेकर सवाल उठाते रहे। इसके बावजूद, ग्रामीण पंजाब में उनका जनाधार मजबूत बना रहा।

सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती: अमरिंदर सिंह
कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई प्रमुख मुद्दे रहे। सीमावर्ती राज्य होने के कारण सुरक्षा चुनौतियों से निपटने को उन्होंने प्राथमिकता दी। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक सख्ती दिखाई और व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया। हालांकि विरोधियों ने रोजगार और औद्योगिक विकास की गति को लेकर आलोचना की। उनका कार्यकाल सुरक्षा-केंद्रित शासन के रूप में देखा जाता है।

वेलफेयर और नई राजनीतिक दिशा: भगवंत मान
भगवंत मान वर्तमान में पंजाब के मुख्यमंत्री हैं और उनकी सरकार वेलफेयर योजनाओं, बिजली-पानी राहत, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार को प्राथमिकता दे रही है। भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और पारदर्शिता के दावों को भी उनकी सरकार की पहचान बताया जाता है। समर्थकों का मानना है कि यह “नई राजनीति” का दौर है, जबकि विपक्ष राज्य के बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव को लेकर सवाल उठाता है। चूंकि उनका कार्यकाल अभी जारी है, इसलिए उनके प्रदर्शन का अंतिम मूल्यांकन समय के साथ ही संभव होगा।

निर्णय आपकी प्राथमिकता पर निर्भर
पंजाब का “सबसे अच्छा मुख्यमंत्री” तय करना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कसौटी को महत्व देते हैं। यदि दीर्घकालिक आर्थिक आधार और कृषि-औद्योगिक विकास को प्राथमिकता है, तो प्रताप सिंह कायरों का नाम सामने आता है। यदि राजनीतिक स्थिरता और ग्रामीण विकास को प्रमुख माना जाए, तो प्रकाश सिंह बादल को समर्थक आगे रखते हैं। यदि सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती को महत्वपूर्ण समझा जाए, तो अमरिंदर सिंह के पक्ष में तर्क मिलते हैं। और यदि सामाजिक कल्याण और वेलफेयर नीतियाँ कसौटी हों, तो भगवंत मान का कार्यकाल चर्चा में आता है।
अंततः यह प्रश्न राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहेगा, क्योंकि हर दौर की उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ अलग रही हैं। इसलिए “सबसे अच्छा” का जवाब एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जनता की प्राथमिकताओं और समय की परिस्थितियों से तय होता है।




