होलिका दहन हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती, लेकिन जब वह अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठी, तो विष्णु कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2025
इस साल होलिका दहन 13 मार्च 2025, गुरुवार को किया जाएगा। भद्रा काल का प्रभाव इस दिन रहेगा, जो सुबह 10:35 बजे से रात 11:29 बजे तक रहेगा। मान्यतानुसार, भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है, इसलिए रात 11:30 बजे के बाद होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा।
होलिका दहन की विधि
होलिका दहन के कुछ दिन पहले से लकड़ियां, उपले (कंडे) और सूखी टहनियां एक स्थान पर इकट्ठा की जाती हैं।
पूजा के समय होलिका के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर उसकी परिक्रमा की जाती है।
रोली, अक्षत (चावल), हल्दी, फूल और गुड़ अर्पित किए जाते हैं।
शुद्ध जल से होलिका की परिक्रमा की जाती है और इसके बाद अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
आहुति के रूप में नारियल, भुट्टे, गेंहू की बालियां, बताशे और मिठाई चढ़ाई जाती है।
परिवार के सभी सदस्य होलिका की अग्नि की परिक्रमा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
होलिका दहन पर किए जाने वाले शुभ कार्य
पान का पत्ता होलिका की अग्नि में डालने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
सुपारी चढ़ाने से भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है।
नारियल अग्नि में समर्पित करने से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
होलिका दहन के बाद प्रसाद का वितरण शुभ माना जाता है।
होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शुद्धता और नए संकल्पों का प्रतीक भी है।




