नई दिल्ली, लोकसभा में सोमवार को आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक (Criminal Procedure Identification Bill 2022) पेश हो गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने इस बिल को पेश किया। बिल को पेश करते वक्त लोकसभा में विपक्षी दलों ने हंगामा भी किया। 58 के मुकाबले 120 मतों से विधेयक को पेश करने की मंजूरी दी गई। सरकार ने बताया कि इससे अपराधियों के रिकार्ड रखने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों सदनों में पास होने के बाद बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद ये बिल कानून की शक्ल ले लेगा।
कानून लागू होने के बाद पुलिस की ताकत काफी हद तक बढ़ जाएगी। बिल के क्या प्रावधान है? आधुनिक तकनीक के जरिए अपराधियों का किस तरह से डेटा सुरक्षित क्या जाएगा? आएये समझते हैं…
बिल के प्रावधान
बिल के प्रावधान में कहा गया है कि गिरफ्तार और दोष सिद्ध अपराधियों से जुड़ी सारी जानकारी का रिकार्ड पुलिस रखेगी। पुलिस किसी भी सजायाफ्ता या किसी अपराध के आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के शरीर का नाप ले सकेगी। इसमें अपराधी का फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट, रेटीना का नमूना, फोटो, ब्लड सैंपल और हस्ताक्षर लिए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य है।
75 सालों तक सुरक्षित रहेगा डेटा
प्रावधान में ये भी कहा गया है कि अपराधियों का डेटा 75 साल तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। डेटा को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की होगी।
पुराने कानून की जगह लेगा नया कानून
विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि मौजूदा अधिनियम को बने 102 साल हो गए हैं। अंग्रेजों के समय बने इस कानून में सिर्फ फिंगर प्रिंट और फुटप्रिंट लेने की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि इससे जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी और दोषसिद्धि भी बढ़ेगी।
विरोध क्यों कर रहा है विपक्ष?
लोकसभा में इस बिल को पेश करते वक्त जमकर हंगामा भी हुआ। विपक्षी दलों के नेताओं ने बिल प रआपत्ति जताई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये बिल संविधान के आर्टिकल 21 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बिल से मानवाधिकारों का भी उल्लंघन होगा।




