द फ्रंट डेस्क: गोरखपुर में भारी बारिश के बाद एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूबी हैं और कुछ जगहों पर घरों और दुकानों तक पानी पहुंच गया है। इसी बीच बीजेपी सांसद रवि किशन के रामगढ़ताल लेक व्यू लेन स्थित आवास के बाहर जलभराव का वीडियो सामने आया है। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रवि किशन गोरखपुर को ‘स्पेन’ और स्मार्ट सिटी जैसा बता चुके हैं। अब उनके आवास के बाहर पानी भरने की तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी जलभराव से जुड़ा वीडियो शेयर किया है। लेकिन इस पूरे विवाद से बड़ा सवाल यह है कि आखिर हर तेज बारिश में गोरखपुर के सामने जलभराव की समस्या क्यों खड़ी हो जाती है, जबकि इसे रोकने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं?
अखिलेश यादव ने VIDEO शेयर कर उठाए सवाल
गोरखपुर में शनिवार को हुई भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ। इसी दौरान रवि किशन के आवास के बाहर सड़क पर पानी जमा होने का वीडियो सामने आया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उनके पुराने ‘स्पेन’ वाले बयान की भी चर्चा शुरू हो गई। रवि किशन ने अगस्त 2026 में गोरखपुर के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए शहर की तुलना स्पेन और स्मार्ट सिटी से की थी। अब बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों को उसी बयान से जोड़कर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी जलभराव से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। वहीं जलभराव को लेकर रवि किशन और बीजेपी पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच कथित फोन बातचीत का वीडियो भी सामने आया, जिसमें दोनों के बीच तीखी बहस की बात कही गई।
हालांकि, गोरखपुर में जलभराव केवल सांसद के इलाके तक सीमित नहीं रहा। शहर के कई दूसरे हिस्सों में भी पानी भरने की रिपोर्ट सामने आई है। इसलिए इस पूरे मामले को सिर्फ एक वीडियो या राजनीतिक बयान के बजाय शहर की व्यापक जलनिकासी व्यवस्था के संदर्भ में देखना जरूरी है।
जलभराव पर सांसद रवि किशन और बीजेपी पार्षद में तीखी बहस, VIDEO वायरल
इसी बीच गोरखपुर में जलभराव की समस्या को लेकर बीजेपी के स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी और सांसद रवि किशन के बीच हुई फोन पर बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बेतियाहाता वार्ड के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने इलाके में जलभराव और जलनिकासी की समस्या को लेकर सांसद से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान रवि किशन ने उनसे पूछा, “सपा ज्वाइन कर लिए क्या?” इस पर पार्षद ने पलटकर कहा, “सांसद जी, आप बसपा ज्वाइन कर लिए क्या?” इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस होती सुनाई देती है। बताया जाता है कि विश्वजीत त्रिपाठी पहले समाजवादी पार्टी से चुनाव जीत चुके हैं और बाद में बीजेपी में शामिल हुए थे। बातचीत का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला गोरखपुर के जलभराव को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में भी चर्चा का विषय बन गया है।
गोरखपुर में पानी रोकने के लिए कितने करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं?
गोरखपुर में जलभराव रोकने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख गोड़धोइया नाला परियोजना है, जिसकी लागत करीब 495.24 करोड़ रुपये बताई गई है। इस परियोजना के तहत करीब 9.25 किलोमीटर लंबा पक्का नाला, इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन, एसटीपी, पंपिंग स्टेशन और पुल-कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य शहर के बड़े हिस्से में जलनिकासी को बेहतर करना और जलभराव की समस्या कम करना है। इसके अलावा नगर निगम ने जलनिकासी से जुड़े 76 कार्यों के लिए करीब 94.88 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शहर के उत्तरी हिस्से में एक बड़े आरसीसी नाले के निर्माण के लिए करीब 125-126 करोड़ रुपये की योजना भी सामने आई है। इन प्रमुख परियोजनाओं की घोषित लागत जोड़ें तो रकम 700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाती है। हालांकि, इसे सीधे ‘700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके’ कहना सही नहीं होगा। स्वीकृत लागत, जारी धन और वास्तविक खर्च अलग-अलग आंकड़े होते हैं। इसके अलावा गोरखपुर में अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए करीब 750 करोड़ रुपये की परियोजना भी सामने आई है। इसके पहले चरण में 220 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बताई गई है। यानी जलभराव से निपटने के लिए योजनाओं का वित्तीय आकार बड़ा है। अब सवाल यह है कि इन परियोजनाओं का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है।
क्या गोरखपुर में जलभराव योगी सरकार के दौरान शुरू हुआ?
गोरखपुर में जलभराव की समस्या नई नहीं है। भारी बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी भरने की शिकायतें कई वर्षों से सामने आती रही हैं। 2022 में भी भारी बारिश के बाद गोरखपुर के कई मोहल्लों में जलभराव हुआ था। सड़कें और गलियां पानी में डूब गई थीं और लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई थी। इससे पहले भी शहर में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती रही है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि रवि किशन के सांसद बनने के बाद गोरखपुर में जलभराव की समस्या शुरू हुई। यह शहर की पुरानी शहरी और जलनिकासी संबंधी चुनौती है। हालांकि, योगी सरकार के दौरान इस समस्या से निपटने के लिए बड़े प्रोजेक्ट जरूर शुरू किए गए हैं। गोड़धोइया नाला परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में बताया गया है। सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से यह दावा भी किया गया है कि ड्रेनेज नेटवर्क मजबूत होने, पंपिंग व्यवस्था बढ़ने और नालों की सफाई के कारण जलभराव वाले इलाकों में कमी आई है। इसलिए तस्वीर के दोनों पहलुओं को साथ देखना जरूरी है। समस्या पुरानी है, लेकिन इसे कम करने के लिए मौजूदा सरकार के दौरान बड़े स्तर पर काम भी हुआ है। इसके बावजूद भारी बारिश में जलभराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
करोड़ों के नाले बनने के बाद भी सड़क पर क्यों रुक जाता है पानी?
गोरखपुर की समस्या सिर्फ बड़े नालों की कमी नहीं है। असली चुनौती पूरे ड्रेनेज नेटवर्क को एक साथ काम करने लायक बनाने की है। बारिश का पानी छोटी नालियों से होकर बड़े नालों तक पहुंचता है और फिर शहर से बाहर निकलता है। अगर किसी इलाके की छोटी नाली जाम है, उसका स्तर सड़क से ऊंचा है, कचरा जमा है या मुख्य नाले तक पानी का रास्ता बाधित है, तो बड़े नाले की क्षमता होने के बावजूद स्थानीय इलाके में पानी जमा हो सकता है। गोरखपुर की भौगोलिक स्थिति भी जलभराव की चुनौती बढ़ाती है। शहर की कम ढलान के कारण बारिश का पानी प्राकृतिक तरीके से तेजी से बाहर नहीं निकलता। तेजी से हुए शहरीकरण और बढ़ती कंक्रीट सतह के कारण पानी के जमीन में समाने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। नालों पर अतिक्रमण और कचरे की समस्या को लेकर भी समय-समय पर रिपोर्ट सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल बड़े नाले बनाना पर्याप्त नहीं है। छोटी नालियों की कनेक्टिविटी, सफाई, सड़क और नाली का स्तर, पंपिंग सिस्टम और पानी के अंतिम निकास को भी एक साथ दुरुस्त करना जरूरी है। 27 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर में पिछले 24 घंटे में 135.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ। अब सवाल यह है कि क्या मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम ऐसी कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश को संभालने के लिए पर्याप्त है?
करोड़ों खर्च होने के बाद भी असली सवाल क्या है?
गोरखपुर में 495 करोड़ रुपये की गोड़धोइया नाला परियोजना, 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की अन्य जलनिकासी परियोजनाएं, करीब 125 करोड़ रुपये की नई नाला परियोजना और 750 करोड़ रुपये की अर्बन फ्लड मैनेजमेंट योजना जैसी बड़ी योजनाएं सामने हैं। लेकिन इन आंकड़ों को सीधे ‘इतने करोड़ खर्च हो चुके’ के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कई परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं और उनके लिए स्वीकृत, जारी और खर्च की गई राशि अलग हो सकती है। फिर भी सवाल अपनी जगह है। जब गोरखपुर को जलभराव से बचाने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बनाई जा रही हैं, तो क्या उनका डिजाइन, स्थानीय नालियों का नेटवर्क, अतिक्रमण, सफाई, पंपिंग और पानी के अंतिम निकास की व्यवस्था एक साथ उस स्तर पर सुधरी है, जिसकी जरूरत शहर को है? रवि किशन के घर के बाहर पानी का वीडियो इस सवाल को राजनीतिक रंग जरूर दे रहा है। अखिलेश यादव के पोस्ट ने भी इसे राजनीतिक बहस में ला दिया है। लेकिन गोरखपुर के लोगों के लिए मुद्दा इससे ज्यादा सीधा है। vबारिश हर साल होगी। कभी कम, कभी ज्यादा। लेकिन सवाल यह है कि अगली तेज बारिश में गोरखपुर की सड़कें फिर पानी में डूबेंगी या करोड़ों रुपये की परियोजनाएं अब शहर को जलभराव से राहत दे पाएंगी? यही गोरखपुर के विकास और उसकी ड्रेनेज व्यवस्था की असली परीक्षा है।




