नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल के संसद से पारित होने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बड़ा ऐलान करते हुए इसे “निंदनीय और घातक” करार दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वह इस बिल के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाएगा और अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा। बोर्ड का कहना है कि यह विधेयक न केवल मुसलमानों के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि इससे समुदाय के धार्मिक और सामाजिक ढांचे पर गहरा असर पड़ेगा।
AIMPLB ने कहा कि यह वक्फ संशोधन बिल मुस्लिम समुदाय के लिए गंभीर संकट पैदा करेगा और इससे जुड़ी समस्याएं भविष्य में और अधिक जटिल हो सकती हैं। बोर्ड ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए।
विपक्ष की भूमिका सराहनीय, लेकिन कुछ सहयोगियों का रवैया निंदनीय
बोर्ड ने विधेयक के विरोध में विपक्षी दलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने पूरी तैयारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ मुसलमानों का पक्ष रखा है। AIMPLB ने विशेष तौर पर विपक्ष के प्रयासों के लिए आभार जताया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विपक्ष इस संघर्ष में बोर्ड के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
हालांकि, AIMPLB ने नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी के रुख को लेकर नाराज़गी जताई है। बोर्ड ने इन नेताओं पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। AIMPLB का कहना है कि इन नेताओं को मुसलमानों ने उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि के कारण समर्थन दिया था, लेकिन उन्होंने इस विश्वास को तोड़ा है।
“धोखा दिया गया, खामियाजा भुगतना पड़ेगा”
बोर्ड ने इन नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुसलमानों के भरोसे को तोड़कर इन्होंने एक ऐसा राजनीतिक धोखा दिया है जिसे न भूला जा सकेगा और न माफ किया जाएगा। AIMPLB ने साफ किया कि इन नेताओं से जुड़े मुस्लिमों को अब अपनी स्थिति और समर्थन को लेकर आत्ममंथन करना चाहिए।
बोर्ड पीछे नहीं हटेगा, पूरा समुदाय साथ
AIMPLB ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी भी राजनीतिक या सरकारी दबाव में नहीं आएगा और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेगा। बोर्ड ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनका अकेले का संघर्ष नहीं है, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय की आवाज़ है, जो एकजुट होकर अपने हक के लिए खड़ा रहेगा।
बोर्ड ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह समुदाय के हितों के खिलाफ कदम उठाकर उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। AIMPLB ने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि वक्फ संपत्तियां न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती हैं बल्कि उनका सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उपयोग भी किया जाता है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिलता है।
आंदोलन का बिगुल बजा, कानूनी लड़ाई भी शुरू होगी
AIMPLB अब पूरे देश में इस बिल के खिलाफ जनजागरूकता और विरोध अभियान चलाने की तैयारी में है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक को चुनौती देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। बोर्ड ने सभी मुस्लिम संगठनों और सामाजिक नेताओं से एकजुट होने की अपील की है ताकि इस बिल के खिलाफ व्यापक जनमत तैयार किया जा सके।
इस राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है और आने वाले दिनों में इसका असर न केवल सियासत बल्कि समाज की दिशा पर भी देखने को मिलेगा। AIMPLB के इस कड़े रुख ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।




