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देहरादून, 12सितम्बर 2021

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालिया सात साल के आंकड़ों के अनुसार भूस्खलन की घटनाओं की संख्या 10 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। कुछेए साल ऐसे भी गुजरे हैं जब ये घटनाएं तीस गुना तक ज्यादा थी। वैज्ञानिक बढ़ते भूस्खलनों के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न में बदलाव और मानवीय गतिविधियों की वजह से पर्वतों के आकार और उनके ढलान में हो रहे परिवर्तन को वजह मानते हैं।

यदि समय रहते इस ओर ध्यान न दिया गया तो समस्या आगे और भी बढ़ सकती है। हालिया कुछ समय में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। चंपावत में इस मानसून सीजन में भूस्खलन की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग 104 बार बंद हुआ। टिहरी में अब तक भूस्खलन की 14 घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि पिछले साल अब तक केवल आठ भूस्खलन ही हुए थे।

न केवल चंपावत और टिहरी बल्कि प्रदेश के सभी पर्वतीय जिलों में यही हालात है। यदि पिछले सात साल के आंकडों पर नजर डाले तो काफी भयावह तस्वीर सामने आती है। डीएमएमसी के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2015 में महज 33 घटनाएं रिकार्ड की गई थी। जबकि वर्ष 2018 में यह संख्या 496, और वर्ष 2020 तक इन घटनाओं की संख्या 972 तक पहुंच गई थी। इस साल अब तक 132 भूस्खलन की घटनाएं रिकार्ड की गई हैं।

हाल के प्रमुख भूस्खलन :

07 सितंबर : नारायणबगड़ में घरों में घुसा मलबा, थरालीबगड़ बाजार के पीछे भूस्खलन

10 सितंबर: बदरीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ में भूस्खलन, तीन वाहन मलबे में दबे

30अगस्त : धारचूला में अतिवृष्टि से सात घर मलबे में दबे, पांच की मौत

24 अगस्त: चमोली में रैणी क्षेत्र में भूस्खलन, तापस के 200 लोगों को किया गया रेस्क्यू

 

दरकतेे पहाड़:

वर्ष  घटनाएं  मौत

2015  33  12

2016  18  24

2017  19  16

2018  496  47

2019  291  25

2020  972  25

2021  132   12

ये अपनाने होंगे उपाय
-विकास की गति को विकेंद्रीकृत किया जाए, एक ही स्थान पर अधिक निर्माण न हों
-पर्वतीय क्षेत्रों में सामरिक महत्व के सड़ृक निर्माण को छोड़कर बाकी पर सशर्त पाबंदी
-सड़कों के निर्माण के साथ-साथ पहाड़ के ट्रीटमेंट की कार्यवाही उससे ज्यादा तेजी हो
-निर्माणधीन सड़कों पर पानी की निकासी का पर्याप्त इंतजाम किया जाना अनिवार्य

सड़कों का निर्माण मानकों के अनुसार ही किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पर्यावरण और पारिस्थिकीय कारक भी भूस्खलन का कारण बन जाते हैं। विभागीय स्तर पर निर्माण और मलबे के निस्तारण के लिए तय  नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है।
हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता लोनिवि