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देहरादून, 15 सितम्बर 2021

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के मुखिया हरीश रावत विधानसभा चुनाव-2022 में किस सीट से लड़ेंगे? यह सवाल उत्तराखंड में न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के नेताओं को भी मथ रहा है। पर, रावत की मानें तो उनके चुनाव लड़ने की संभावना 50 फीसदी भी नहीं है।

बकौल रावत, मैं चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं हूं। मैं नहीं चाहता कि मेरी दावेदारी से कोई विवाद हो। मैं केवल और केवल तभी चुनाव लड़ूंगा जब हाईकमान मुझे आदेश देगा। विधानसभा चुनाव और टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर जारी खींचतान के बीच रावत से मन की बात पूछी।

बकौल हरीश रावत, मेरा चुनाव लड़ना, न लड़ना सब पार्टी तय करेगी। व्यक्तिगत रूप से मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से पार्टी में कहीं विवाद दिखाई दे। मेरी मजबूरी है कि मेरा नाम, सबसे चर्चित नाम है लेकिन इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। मैं तो वर्ष 2002, 2007 और 2012 में भी चुनाव नहीं लड़ा। पर इस बार मैं वर्ष 2002 वाले मूड में हूं। तब भी इतिहास बना था और इस बार भी इतिहास रचने का मौका है।

रावत की रणनीति कहीं यह तो नहीं : रावत समर्थकों का भी मानना है कि रावत का चुनाव लड़ने से ज्यादा बेहतर चुनाव लड़ाना होगा। रावत चुनाव में जिस भी सीट पर खड़े होंगे, भाजपा और उसकी सभी शक्तियां रावत को उसी क्षेत्र में उलझाए रखने को पूरी ताकत झोंक सकती हैं। चूंकि रावत कांग्रेस का मुख्य चेहरा है, इसलिए उनका दूसरी सीटों पर ठीक से उपयोग न हो पाएगा। चुनाव के बाद सरकार बनने की स्थिति आने पर रावत अपने लिए बाद में भी सीट खाली करवा सकते हैं। रावत के करीबी सूत्र भी इस फार्मूले की पुष्टि कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री बनना नहीं सरकार बनाना लक्ष्य
हरीश रावत ने कहा कि इस वक्त मेरा लक्ष्य मुख्यमंत्री बनना नहीं बल्कि कांग्रेस को सरकार में लाना है। मेरी व्यक्तिगत आकांक्षा को पार्टी की आकांक्षा में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। यदि मुझे टिकट के लिए कहा भी जाएगा तो पहले तो मैं यही कहूंगा कि किसी और अवसर दे दिया जाए।

जाने क्यों लोग मेरा विरोध करते हैं…
उत्तराखंड की 21 साल की राजनीति में मैं अब तक नहीं समझ पाया कि मेरा विरोध क्यों है? सत्ता पक्ष और उसे इतर भी जाने क्यों नाराजगी है। जबकि मेरी प्रकृति कभी किसी को नुकसान पहुंचाने की नहीं रही। जो लोग मेरा साथ छोड़कर गए, मैंने उनके प्रति भी दुर्भावना नहीं रखी।