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हल्द्वानी, 27 नवंबर 2021

कुमाऊं में भाजपा व कांग्रेस के नेताओं की दूसरी पीढ़ी विधान सभा जाने को तैयार है। दोनों पार्टियों के दिग्गज नेताओं के बेटे इस विधान सभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं। भाजपा में कालाढूंगी, रामनगर, काशीपुर व रानीखेत से भाजपा नेताओं के बेटे चुनावी रण में उतरने को तैयार बैठे हैं। वहीं हल्द्वानी से नेता प्रतिपक्ष रहीं इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश।

सल्ट से कांग्रेस नेता रणजीत सिंह रावत के बेटे विक्रम रावत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे आनंद रावत भी इस बार विधानसभा चुनाव में उतरकर अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उधर, पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा विधान सभा में दूसरी पारी खेलने की तैयारी में लगे हैं।

जगमोहन बिष्ट: रामनगर
रामनगर के भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट के पुत्र जगमोहन सिंह बिष्ट इस बार विधान सभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति रहे जगमोहन रामनगर डिग्री कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष व कार्यालय मंत्री रह चुके हैं। छात्रों के मुद्दों को लेकर दो बार विधानसभा का घेराव कर चुके हैं। जगमोहन कहते हैं कि युवा पीढ़ी को भी राजनीति में बराबर का मौका मिलना चाहिए। इस बार उन्हें उम्मीद है कि प्रदेश नेतृत्व अधिक से अधिक युवाओं को टिकट देगा। ताकि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में अधिक से अधिक युवा चुनाव जीतकर विधान सभा में जा सकें।

त्रिलोक सिंह चीमा: काशीपुर
काशीपुर के विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। उन्होंने एक माह पहले ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। त्रिलोक सिंह चीमा के मुताबिक वह अब तक एक उद्यमी की तरह अपनी इंडस्ट्री का काम देख रहे थे। लेकिन पिछले 20 सालों से पिता हरभजन सिंह चीमा के राजनैतिक कामों को भी देखते आए हैं। उन्हें उम्मीद है कि पार्टी इस बार युवाओं को अधिक मौका देगी। इसीलिए वह भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। उनका प्रयास रहेगा कि पिता के पदचिह्नों पर चलकर क्षेत्र के विकास के लिए काम करें।

विक्रम रावत: सल्ट
पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह रावत के पुत्र विक्रम रावत इस बार सल्ट विधान सभा सीट से कांग्रेस से टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। उन्होंने 2017 के चुनाव में भी कांग्रेस से टिकट की दावेदारी की थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे विक्रम रावत को उम्मीद है कि इस बार उन्हें टिकट जरूर मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह क्षेत्र से पूरी तैयारी के साथ चुनाव अभियान में जुट चुके हैं। सल्ट के ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत का मानना है कि युवा पीढ़ी को अधिक से अधिक टिकट दिए जाने चाहिए। क्षेत्र के विकास के मुद्दे को लेकर वह चुनाव लड़ेंगे। सदन में पहुंचकर क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करेंगे।

शशांक रावत: रानीखेत
भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे बची सिंह रावत के पुत्र शशांक रावत इस बार रानीखेत विधान सभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इसके लिए क्षेत्र में लंबे समय से काम शुरू कर दिया था। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के साथ ही भाजयुमो में काम कर चुके शशांक का कहना है कि वह क्षेत्र में पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनका सपना है कि वह अपने पिता की तरह क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करें। शशांक इन दिनों क्षेत्र में रहकर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि पार्टी इस बार युवाओं को बड़ी संख्या में नेतृत्व का मौका देगी। ताकि युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में युवा विधायकों की सरकार बन सके।

आनंद रावत: तय नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र आनंद सिंह रावत को भी इस विधान सभा चुनाव में राजनीतिक शुरुआत चाहिए। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ ही क्षेत्र में लंबे समय से सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं। आनंद ने इस बार कांग्रेस से टिकट मांगा है। वह कहते हैं कि पार्टी जिस विधान सभा सीट से भी उन्हें टिकट देगी, वह पूरे समर्पण के साथ चुनाव में जुट जाएंगे। वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री हैं। आनंद का मानना है कि 50 फीसदी टिकट युवाओं को दिए जाने चाहिए। ताकि युवा अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी ऊर्जा के साथ काम कर सकें।

सौरभ बहुगुणा-संजीव आर्य: दूसरी पारी की तैयारी
पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य व पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा ने 2017 के विधान सभा चुनाव से राजनीति की शुरुआत की थी। तब चुनाव जीतकर दोनों पहली बार विधायक बने। उत्तराखंड में युवा पीढ़ी का नेतृत्व करने वाले दोनों विधायक इस बार विधान सभा में दूसरी पारी की शुरुआत करने की तैयारी में जुट गए हैं। दोनों नेताओं को उम्मीद है कि उनकी वर्तमान सीट नैनीताल और सितारगंज से ही उन्हें दोबारा टिकट मिलेगा। लेकिन संजीव आर्य इस बार नैनीताल से भाजपा नहीं कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

सुमित हृदयेश: हल्द्वानी
नेता प्रतिपक्ष रहीं इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश इस बार हल्द्वानी विधानसभा से कांग्रेस के प्रबल दावेदार हैं। वह लंबे समय से इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हैं। हल्द्वानी मंडी समिति के अध्यक्ष रहे सुमित हृदयेश हल्द्वानी में काफी समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं। पार्टी संगठन से उन्हें कांग्रेस पब्लिसिटी कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुमित का मानना है कि इस बार उत्तराखंड की विधान सभा में अधिक से अधिक युवा चुनाव जीतकर जाएंगे। उन्हें कांग्रेस नेतृत्व से पूरी उम्मीद है कि इस बार हल्द्वानी से टिकट उन्हें ही मिलेगा। विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।

विकास भगत:कालाढूंगी
कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत के पुत्र विकास भगत भी इस बार कालाढूंगी विधान सभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हुए हैं। भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रहे विकास भगत लंबे समय से क्षेत्र में भाजपा की राजनीति कर रहे हैं। कोरोना काल में उन्होंने गरीबों तक भोजन पहुंचाने के साथ घर-घर राशन बांटा। कालाढूंगी विकास क्षेत्र में वह कैबिनेट मंत्री भगत द्वारा स्वीकृत कराई गईं विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। विकास का कहना है कि इस बार भाजपा युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। ऐसे में उम्मीद है कि अधिक से अधिक युवाओं को टिकट मिलेगा।