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पिथौरागढ़, 31 अगस्त 2021

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला व मुनस्यारी के गांव विस्थापन के इंतजार में साल दर साल उजड़ रहे हैं। सरकारी संवेदनहीनता के चलते सैंकड़ों ग्रामीणों ने अपनी मातृभूमि छोड़नी पड़ी है। एक दिन पहले तक हंसते खेलते जुम्मा के जामुनी और सिरौउडयार तोकभी अब इन बरबाद गांव की फेहरिस्त में शामिल हो गए है। हर तरफ मरघटी सन्नाटा है। भारत चीन, नेपाल सीमा से सटे सीमांत के खुशहाल गांवों को प्रकृति की नजर लग गई है।

जुम्मा में रविवार की रात 1.30 बजे करीब 700 मीटर दूर से आसमानी आफत पहाड़ के मलबे के साथ मौत बनकर बरसी। जिसने इस गांव के दो तोकों के भूगोल को बदल कर रख दिया। 20साल में 15 से अधिक बार बादल फटने की यहां ऐसी घटनाएं हुई हैं। जिससे इन सालों में आपदा में 360 से लोग जान गवां चुके हैं।

मुनस्यारी व धारचूला में 100से अधिक गांव आपदा के लिहाज से संवेदनहशील हैं। धारचूला में 243 व मुनस्यारी में 137 परिवार ऐसे हैं जो भारी खतरे के बीच मानसूनकाल काट रहे हैं। हालत यह है कि आपदा में किसी तरह बच निकलने वाले अधिकतर सक्षम लोग अब हर साल  गांव छोड़ रहे हैं। धारचूला – मुनस्यारी के 150 से अधिक परिवार बिना सरकारी मदद के पिछले एक दशक में गांव छोड़ चुके हैं।

इन गांवों का होना है विस्थापन
तांकुल, कनार, छलमाछिलासो, हिमखोला, जिप्ती, धारपांगू, रांथी, जम्कू, कुलथम, सेनर, तोमिक, तल्ला भैंसकोट, बमनगांव खालसा, छाना, कोट्यूड़ा, गोठी, बाता, हुड़की, कनार, मेतली, गैला, लोद, जोशा, धापा, मालोपाती, सिलौनी, आकोट, नयाबस्ती, जुम्मा, साड़ा, गोल्फा, सानीखेत, गर्गुवा, बुंगबुंग, सुवा, टांगा, न्वाली।

आपदा काल में दिए 4 करोड़ रुपये
पिथौरागढ़। सरकार ने धारचूला के 243व मुनस्यारी के 137 परिवारों के विस्थापन के लिए इस मानसूनकाल से ठीक पहले 4करोड़ मंजूर किए।आपदा काल की दस्तक के कारण इनके विस्थापन का काम अभी शुरू नहीं हो सका है।

एक दशक में इतने परिवारों ने छोड़े घर
कुलथम    20
क्वीरीजिमिया    22
धापा    39
दुम्मर    21
भंडारीगांव    19
नयाबस्ती    16
गोल्फा    24
मदरमा    5