
देहरादून, 23 नवंबर 2021
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के एक गुट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी (महानिर्वाणी) ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड भंग किए जाने की मांग को लेकर अखाड़ा परिषद संतों को साथ लेकर गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन करेगा। उससे पहले अखाड़ा परिषद मुख्यमंत्री को लिखित ज्ञापन सौंपेगा और बोर्ड बनने से प्रभावित पुरोहितों से भी मिलेगा।
श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि सत्ता पक्ष के कई विधायक भी बोर्ड बनने के खिलाफ हैं। विधानसभा अध्यक्ष को भी एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड भंग करने को लेकर सरकार को 30 नवंबर तक का समय दिया जा रहा है। इस अवधि में सरकार अगर उनकी मांग पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो संतों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
श्रीमंहत रविंद्र पुरी ने कहा कि साधु समाज ने कुंभ के दौरान तत्कालीन भाजपा के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को देवस्थानम बोर्ड को भंग कर हक-हुकूक धारियों एवं ब्राह्मणों को उनका देने की बात कही थी। लेकिन भाजपा सरकार ने इस मांग पर कोई विचार नहीं किया। रविंद्रपुरी ने कहा कि साधु समाज राज्य सरकार से मांग करता है कि 30 नवंबर तक सरकार देवस्थानम बोर्ड को भंग करे।
उन्होंने कहा कि इसके लिए वह फिर से राज्य के मुख्यमंत्री से मिलकर मांग पत्र सौंपेंगे। श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि सरकार को मठ-मंदिरों की सदियों से चली आ रही व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप से बचना चाहिए। संत समाज व पुराहितों द्वारा परंपराओं के अनुसार समाज हित के लिए मठ-मंदिरों का संचालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि मठ-मंदिरों के अधिग्रहण के विरोध में रविवार को अखिल भारतीय संत समिति द्वारा दिल्ली में आयोजित धरने में संत समाज द्वारा इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया तथा निर्णय लिया गया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व संबंधित राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि देश के सभी राज्यों में जितने भी मठ मंदिरों का अधिग्रहण सरकार ने किया हुआ है ऐसे सभी मठ मंदिरों को सरकार के अधिग्रहण से मुक्त करने के लिए सरकार को 25 दिसंबर तक ठोस निर्णय लेने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि ऐसा नहीं करती तो साधु समाज इस विषय पर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा।
सीएम से पीएम की तरह घोषणा करने मांग
श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि जिस प्रकार तीनों कृषि कानून निरस्त करने का ऐलान कर प्रधानमंत्री ने सराहनीय निर्णय लिया है। उसी प्रकार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विधानसभा के आगामी सत्र में विधेयक लाकर देवस्थानम बोर्ड को निरस्त करने की घोषणा करें।
पीएम और गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात
अखाड़ा परिषद के कोषाध्यक्ष श्रीमहंत जसविंद्र सिंह ने कहा कि अधिग्रहित मठ-मंदिर मामले में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से जल्द मुलाकात करने दिल्ली जाएंगे। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि सरकारों को मठ-मंदिरों का अधिग्रहण करने के बजाए उनके संचालन में संत समाज का सहयोग करना चाहिए। मठ-मंदिरों से होने वाली आय को संत समाज द्वारा शिक्षा, चिकित्सा जैसे सेवा प्रकल्पों पर खर्च किया जाता है। जिससे समाज के जरूरतमंद वर्ग को लाभ मिलता है।
तीर्थ पुरोहितों ने कैबिनेट मंत्री सुबोध-बिशन के आवास का किया घेराव
चार धाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत से जुड़े तीर्थ पुरोहितों ने कैबिनेट मंत्रियों के आवासों पर प्रदर्शन किया। मंत्रियों का घेराव किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीर्थ पुरोहितों ने जमकर आक्रामक तेवर दिखाए। जल्द देवस्थानम बोर्ड भंग न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई। तयशुदा कार्यक्रम के तहत तीर्थ पुरोहित सबसे पहले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर पहुंचे। आवास के गेट के बाहर बैठकर उन्होंने जमकर नारेबाजी की।
एक तीर्थ पुरोहित ने शीर्षासन कर भी विरोध जताया। महापंचायत के संयोजक सुरेश सेमवाल ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड उन्हें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। इस बोर्ड को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने 30 अक्तूबर तक देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की थी। आश्वासन भी दिया गया था। इसके बावजूद अभी तक बोर्ड को भंग करने की कोई कार्रवाई सरकार की ओर से नहीं की गई है।
ये सीधे तौर पर तीर्थ पुरोहितों के साथ वादाखिलाफी है। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने आक्रोश भी व्यक्त किया। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने आश्वासन दिया कि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई होगी। सरकार हाईपॉवर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। कमेटी की रिपोर्ट को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने नाराजगी जताई। कहा कि कमेटी की ओर से उनका पक्ष सुना ही नहीं गया। न मिलने को कोई बुलावा भेजा गया।
इसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल के आवास का घेराव किया। बिशन सिंह चुफाल को घेरते हुए कहा कि उन्हें हाईपॉवर कमेटी पर कोई विश्वास नहीं है। उन्हें सिर्फ दो टूक देवस्थानम बोर्ड भंग चाहिए। इसके अलावा कुछ भी और मंजूर नहीं है। शेष मंत्री आवास पर न होने के कारण उनके आवासों का घेराव नहीं हो पाया। अब 27 नवंबर को सचिवालय कूच किया जाएगा।







