Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel

पिथौरागढ़, 11 नवंबर 2021

डीडीहाट विधानसभा इन दिनों सुर्खियों में है. सुर्खियों की वजह है कि इसका सीएम पुष्कर सिंह धामी का पैतृक निवास होना. ऐसे में ये चर्चाएं लगातार जोर पकड़ रही हैं कि सीएम धामी डीडीहाट सीट से चुनावी समर में कूद सकते हैं. ये बात और है कि इस सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता बिशन सिंह चुफाल पिछले 25 साल से काबिज हैं.

अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही डीडीहाट विधानसभा में बिशन सिंह चुफाल की सत्ता काबिज है. चुफाल उत्तराखंड बीजेपी के कद्दावर नेताओं में भी शुमार हैं. सीएम पद के अलावा सूबे की सियासत के सभी बड़े ओहदों पर चुफाल रह चुके हैं. बावजूद इसके डीडीहाट विधानसभा से सीएम पुष्कर सिंह धामी के चुनावी अखाड़े में उतरने की चर्चाएं लगातार जोर पकड़ रही हैं. इन चर्चाओं को बल इसलिए मिल रहा है कि सीएम धामी डीडीहाट के हड़खोला गांव के रहने वाले हैं. वहीं डीडीहाट के विधायक और कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल की मानें तो कुछ लोग सोशल मीडिया में बिना सिर-पैर का फर्जी माहौल बना रहे हैं. चुफाल कहते हैं कि सबकुछ पार्टी तय करती है. सोशल मीडिया की चर्चाओं से टिकट तय नहीं होते हैं.

आसान नहीं होगा बीजेपी के लिए चुफाल का टिकट काटना

चुफाल जैसे कद्दावर नेता के रहते डीडीहाट से किसी और को चुनावी अखाड़े में उतारना आसान नहीं है. फिर भी सीएम के डीडीहाट से लड़ने की चर्चाएं थमने का नाम नही ले रही हैं. ये बात और है कि कांग्रेस भी इस सीट पर जीत स्वाद चखने के लिए रात-दिन एक किए हुए है. उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद डीडीहाट इकलौती ऐसी सीट है, जहां कांग्रेस की पकड़ कभी इतनी मजबूत नहीं हुई कि वह जीत में तब्दील हो सके. कांग्रेस के विधायक हरीश धामी का दावा है कि चुफाल-धामी में बीजेपी भले ही उलझी हो, लेकिन इस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस ने पूरा जोर लगाया हुआ है.

वक्त का इंतजार

डीडीहाट से चुनावी अखाड़े में सीएम उतरते हैं या फिर चुफाल ही जीत का छक्का लगाते हैं, ये तो आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा. लेकिन जब तक चुनावी सूरत साफ नहीं हो जाती है, तब तक ऐसी कई चर्चाएं चुनावी फिजां में तैरती नजर आएंगी.