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देहरादून, 26 नवंबर 2021

मेरा विभू सेना में अफसर बनने के लिए आखिरी कोशिश तक लगा रहा। सेना में भर्ती होकर देश के लिए आखिरी सांस तक लड़ता रहा। वह दुनिया में अपना नाम अमर कर गया और हमारा नाम रोशन कर गया। शौर्य चक्र मिलना उन सभी लोगों का भी सम्मान है, जो विभूति को देश का असली हीरो मानते हैं। वह दुनिया से चला गया, लेकिन कभी नहीं मिटने वाली धरोहर छोड़ गया है।

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की मां सरोज ढौंडियाल ने गुरुवार भावुक मन से यह बातें कहीं। दिल्ली से घर लौटने के बाद गुरुवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में मां सरोज ने बताया कि 22 नवंबर उनके लिए गौरवशाली दिन रहा, उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अपने बेटे की वीरता का शौर्य चक्र सम्मान मिला। पीएम नरेंद्र मोदी और देश की कई बड़ी हस्तियों से मिलने का मौका मिला। पीएम मोदी ने मुलाकात करते हुए उनका हालचाल जाना और हौसला बढ़ाया। मां सरोज बताती हैं कि उनके बेटे ने सेना में अफसर बनने के लिए बहुत मेहनत की थी। लोग उसकी वीरता को जानते हैं, उसके सेना की वर्दी पहनने के पीछे के संषर्घ को भी जानना चाहिए। 12वीं के बाद एनडीए और सीडीएस में कई कोशिशें की, लेकिन असफल रहा। बीएएसी करने के बाद आखिरी उम्मीद तक वह लगा रहा।

मां बताती हैं कि लगभग चार के परिश्रम के बाद आखिरकार ओटीए के जरिये सेना में भर्ती होकर माना। घर से कोई दबाव भी नहीं था, फिर भी वह सेना में गया। उसे देश के लिए बड़ा काम करना था, इसलिए उसकी मंजिल सेना ही थी। उसे अपने पर भरोसा था। बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीर में सेना के एक ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए देहरादून के नेशविला रोड निवासी मेजर विभूति ढौंडियाल 18 फरवरी 2019 को शहीद हो गए थे। इस ऑपरेशन में उन्होंने एक खूंखार आतंकी को ढेर किया था। मेजर विभूति को मरणोपरांत शौर्य चक्र दिया गया। बीते सोमवार को मां सरोज ढौंडियाल और पत्नी लेफ्टिनेंट नितिका कौल ने राष्ट्रपति से यह पुरस्कार ग्रहण किया।

दिल्ली में अफसर बहू के साथ बिताए चार दिन

मां सरोज बताती हैं कि उनका बेटा बहुत खुशमिजाज था, बहू नितिका भी बहुत अच्छी हैं। दिल्ली में 20 से 24 नवंबर तक चार दिनों तक सास-बहू साथ रहे। दोनों ने एक-दूसरे के साथ वक्त बिताया। बीते बुधवार को नितिका अपनी सैन्य ड्यूटी के लिए रवाना हुईं तो मां सरोज देहरादून लौटीं। शहीद मेजर विभूति की शहादत के बाद उनकी पत्नी नितिका ने भी सेना में भर्ती होने का फैसला लिया। कड़ी चुनौती पार कर नितिका सेना में अफसर बनीं। इसी साल 29 मई को वह पास आउट हुईं और अब देश की सेवा कर रही हैं। मेजर विभूति के साथ-साथ उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट नितिका की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है।

शहीद विभूति के नाम लोग देशभर से भेजते हैं प्यार

शहीद मेजर विभूति के नाम देशभर से लोग राखी, दीये, पेटिंग के जरिये प्यार भेजते हैं। रक्षा बंधन पर उनके घर डाक के जरिये राशियां आती हैं। दिवाली पर लोग दीये भेजते हैं। किसी प्रशंसक ने मेजर विभूति की तस्वीर पेंटिंग कर भेजी थी। कोई लिखता है कि मेजर विभूति उनके असली हीरो हैं, तो कोई लिखता है वह हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। बता दें कि शहीद मेजर विभूति की तीन बहने हैं। सबसे बड़ी बहन पूजा दून में ही रहती हैं। उनके पति सैन्य अफसर हैं। दूसरे नंबर की बहन अमेरिका में रहती हैं। तीसरे नंबर की बहन वैष्णवी मां के साथ दून में रहती हैं।

बटालियन में जाने के बाद से ही कई सफल सैन्य ऑपरेशन किए
शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की मां सरोज ढौंडियाल ने 22 नवंबर 2021 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों में शौर्य चक्र सम्मान प्राप्त किया। उनके साथ बहू लेफ्टिनेंट नितिका भी इस पल की साक्षी बनीं। पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट समेत अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति संपन्न हुए कार्यक्रम में शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की शौर्यगाथा सुनाई गई। राष्ट्रपति से शौर्य चक्र प्राप्त करने पहले मेजर विभूति की वीरता का बखान किया गया। भारतीय सेना में कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स के मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल 55 बटालियन राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। बताया गया कि मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल ने अपनी बटालियन में आने के तुरंत बाद से ही कई सफल अभियानों का उत्कृष्ट नेतृत्व करते हुए अद्वितीय पराक्रम का परिचय दिया।

मेजर विभूति ने पुलवामा हमले के जिम्मेदार आतंकी ढेर कर दी थी शहादत
14 फरवरी 2019 को पुलवामा के सीआरपीएफ काफिले पर हमला हुआ। इसके लिए जिम्मेदार आतंकवादी समूह की गांव पिंगलाना जिला पुलवामा में मौजूदगी की सूचना मिली। इसपर 18 फरवरी 2019 को चलाए गए सैन्य अभियान की कमान मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल ने संभाली। खोजबीन के दौरान आतंकवादियों की ओर से अंधाधुंध गोलीबारी की गई। गोली लगने से घायल होने के बावजूद जांबाज मेजर ढौंडियाल ने अपने रण कौशल से आतंकवादियों की गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया। अपने प्राणों की परवाह न करते हुए वह छुपे हुए आतंकवादियों की गोली की बौछारों के बीच रेंगते हुए उनके नजदीक पहुंचे और भागते हुए आतंकवादियों पर सटीक गोलीबारी कर एक आतंकवादी को मार गिराया। मारे गए आतंकवादी की पहचान जैश ए मोहम्मद तंजीम के खतरनाक आतंकवादी के रूप में हुई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद आखिरी सांस तक आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए अंतत: मेजर विभूति ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति दी। मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल ने अदम्य साहस, असाधारण बहादुरी एवं अनुकरणीय निस्वार्थ सेवा का प्रदर्शन करते हुए भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा में अपना सर्वोच्य बलिदान दिया।

पति की शहादत के बाद सेना में जाने का लिया फैसला
देहरादून। मेजर विभूति की शहादत के बाद बहू नितिका ने सैन्य अफसर बनने का फैसला लिया। मां सरोज ढौंडियाल बताती हैं कि विभूति की शहादत के डेढ़ महीने बाद नितिका ने कहा कि मां मुझे सेना में जाना है। इसपर उन्होंने कोई एतराज नहीं जताया और हौसला बढ़ाया। वह कहती हैं कि उनकी बहू बहुत समझदार है। मां कहती हैं कि उन्होंने बहू के रूप में बेटा पाया है। नितिका 29 मई 2021 को ही भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट पास आउट हुईं। चेन्नई ओटीए में उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया। अभी लेफ्टिनेंट नितिका भटिंडा में तैनात हैं। वह भी दिल्ली में सम्मान समारोह में उपस्थित रहीं।

विभूति में बचपन से था सेना में अफसर बनने का जुनून
देहरादून। शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल बचपन में ही ठान चुके थे कि उन्हें सेना में अधिकारी बनना है। वह अपने मामा की सेना की कैप पहनकर अक्सर फौजी बनने की एक्टिंग करते थे। उनके दोस्त भी उनकी जिंदादिली के कायल थे। मेजर विभूति के दोस्त अरुण कोटनाला ने शहादत के समय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वह दोनों एक साथ ही सेना में जाने की तैयारी में जुटे थे। आरआईएमएसी की प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिलने पर दोनों ने एनडीए की तैयारी की। सफलता नहीं मिली तो गेजुएशन के बाद दोनों ने मिलकर सीडीएस की परीक्षा दी। सफलता नहीं मिलने पर इसपर अरुण ने तो प्रयास छोड़ दिया, लेकिन विभूति ने सेना में जाने की ललक को जारी रखा। आखिरकार ओटीए चेन्नई में वह प्रवेश पाने में सफल रहे। शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल की तीन बहने हैं। दो ही शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बहन वैष्णवी मां सरोज ढौंडियाल के साथ दून में रहती हैं। वही मां की देखभाल करती हैं। शहीद विभूति का परिवार मूलरूप से पौड़ी के बैजरों के पास ढौंड गांव का रहने वाला है, लेकिन उनके दादा केएन ढौंडियाल 1952 में ही देहरादून आकर बस गए थे। विभूति के पिता और दादा दोनों राजपुर रोड स्थित एयरफोर्स के सीडीए कार्यालय से रिटायर थे।

पति के पार्थिव शरीर को चूमकर कहा था आई लव यू विभू
देहरादून। 19 फरवरी 2019 को शहीद विभूति ढौंडियाल की अंतिम यात्रा के दौरान कुछ ऐसा हुआ था, जैसा शायद ही पहले किसी ने देखा हो। पत्नी नितिका ने शहीद मेजर विभूति के पार्थिव शरीर को चूमा, आई लव यू बोला और फिर सैल्यूट मारकर अंतिम विदाई दी। नितिका का यह प्रेम और सम्मान का भाव देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं थी। अंतिम दर्शन के दौरान नितिका टकटकी लगाकर खड़ी होकर पति के पार्थिक शरीर को देखती रहीं। 18 अप्रैल 2018 को विभूति और नितिका की शादी हुई थी। दस महीने बाद 18 फरवरी 2019 को मेजर विभूति की शहादत की खबर आई। विभूति जनवरी में ही छुट्टी खत्म कर ड्यूटी गए थे और मार्च में आने का वादा किया था।

सेंट जोजेफ्स एकेडमी की मेजर विभूति की वीरता पर नाज
देहरादून। मेजर विभूति ढौंडियाल ने वर्ष 2000 में दसवीं तक की पढ़ाई सेंट जोजेफ्स एकेडमी से की। सेंट जोजेफ्स एकेडमी एल्युमिनाई एसोसिएशन को मेजर विभूति की वीरता पर नाज है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गोयल बताते हैं कि एकेडमी ने देश को कई सैन्य अफसर दिए हैं। शहीद विभूति के सम्मान में जितना भी कहा जाए उतना कम है। राष्ट्र की ओर से मेजर शहीद विभूति की वीरता को शौर्य चक्र सम्मान से नवाजा जाना बेहद गर्व का विषय है। एसोसिएशन ने पिछले साल शहीद मेजर विभूति की शहादत को याद करते हुए स्कूल कैंपस में कार्यक्रम किया था। इसमें नम आखों से शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों को सम्मानित किया गया था।

दून को गहरे जख्म देकर गया पुलवामा आतंकी हमला
देहरादून। कि जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद सेना की ओर से कश्मीर घाटी में कई सैन्य ऑपरेशन चलाते हुए आतंकवादियों पर कार्रवाई की गई थी। पुलवामा में हुआ आतंकी हमला दून को गहरे जख्म देकर गया। इस घटना से लेकर जवाबी कार्रवाई तक दून के तीन लाल देश के लिए शहीद हुए। एक के बाद एक तीन शहादत की खबरों से दून के लोगों को बड़ा धक्का लगा। एक शहीद की अंतिम यात्रा संपन्न होती तो दूसरे शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचता। सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में दून निवासी मोहन लाल रतूड़ी ने शहादत दी। इसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में दून के दो जांजाबों अफसरों ने देश के लिए बलियान दिया। 17 फरवरी को शहीद मोहन लाल रतूड़ी की अंतिम यात्रा के दिन मेजर चित्रेश बिष्ट के शहीद होने की खबर आई। मेजर बिष्ट एलओसी पर ब्लॉस्ट में शहीद हो गए थे। बारूदी सुरंग को डिफ्यूज करने के दौरान हादसा हुआ था। 18 फरवरी को मेजर चित्रेश बिष्ट की दून में अंतिम यात्रा निकली। दूनवासियों की आंखें उनके जाने के गम में नम ही थीं कि उसी दिन मेयर विभूति नारायण ढौंडियाल के शहादत की खबर आई। पुलवामा आतंकी हमले से लेकर जवाबी कार्रवाई में दून के तीन जांबाजों ने देश के लिए अपनी शहादत दी।

…और शौर्य यात्रा बन गई थी शहीद विभूति की अंतिम यात्रा
देहरादून। 19 फरवरी 2019 का दिन दून के लोगों को आज भी याद है। बारिश के बावजूद शहीद विभूति ढौंडियाल की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। पूरे शहर ने जांबाज को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। विभूति की वीरता के नारे लगाए गए। भारत माता की जय का नारा भी गूंज उठा। इससे पहले 18 फरवरी की देर शाम देहरादून के नेशविला रोड डंगवाल मार्ग स्थित घर पर शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल का पार्थिव शरीर पहुंचा था। रात से ही घर के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई थी। हर किसी के दिल में दून के बेटे को खोने का दर्द था। अगले दिन बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। कई किमी तक लोगों ने सड़क के दोनों छोर पर खड़े होकर अंतिम विदाई दी। पार्थिव शरीर ले जा रहे वाहन पर पुष्प वर्षा की गई।