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देहरादून, 1 अक्टूबर 2021

करीब एक साल की तनातनी के बाद उत्तराखंड सरकार ने कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और बीजेपी नेता शमशेर सत्याल को हटा दिया. राजधानी देहरादून में एक आलीशान बिल्डिंग में कर्मकार कल्याण बोर्ड का ऑफिस है. इस ऑफिस का काम वैसे तो श्रम बोर्ड में रजिस्टर्ड हज़ारों श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने का है. लेकिन, ये दफ्तर पिछले एक साल से सियासी जंग का अखाड़ा बना हुआ था. सत्याल को हटाने को लेबर मिनिस्टर हरक सिंह रावत ने मूंछों की लड़ाई बना लिया था. आंखिर है क्या इस बोर्ड में कि नेताओं के सम्मान का सवाल बन गया? जानते हैं इस रिपोर्ट में?

300 करोड़ के बजट वाले बोर्ड का अध्यक्ष यूं तो विभागीय मंत्री होता है, लेकिन पिछले साल अक्टूबर में सीएम रहते त्रिवेन्द्र रावत ने मंत्री को हटाने के बाद एक पुराने भाजपाई और अपने करीबी शमशेर सत्याल को अध्यक्ष की गद्दी पर बैठा दिया था. मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि तब विभागीय मंत्री होने के साथ ही, बोर्ड का अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया. उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने की सूचना भी मीडिया से मिली. खासे नाराज़ हरक सिंह ने सत्याल को बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया था. हालांकि, हरक सिंह का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है.

कैसे शुरू हुआ झगड़ा और कैसे बढ़ा?
दरअसल झगड़ा तब शुरू हुआ जब बोर्ड के बजट में गड़बड़ी की ख़बरें आईं. तब सीएम रहे त्रिवेन्द्र रावत ने मंत्री को हटाकर अपने करीबी शमशेर सत्याल की अध्यक्ष पद पर तैनाती कर दी थी. गड़बड़ी की फाइलें खुलीं और खुलती ही चली गईं. मंत्री ने इसे अपनी मूंछ का सवाल बनाया. हंगामा बरपा, बयानबाज़ी हुई, जांच भी बैठी. इस बीच सीएम दो बार बदल गए लेकिन मंत्री जी का इंतज़ार अब जाकर खत्म हुआ.

कांग्रेस के आरोप और राजनीतिक मुद्दा

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी अब भाजपा सरकार की मंशा पर उंगली उठा रही है. नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि अध्यक्ष बदलना न बदलना ये सरकार का आंतरिक मामला है. लेकिन, सरकार बोर्ड में चल रही खींचतान, घपले, घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराए. बहरहाल, चुनाव के माहौल में मंत्री हरक सिंह लगातार अपने नेताओं पर हमलावर रहे हैं. दो दिन पहले उन्होंने उत्तराखंड के नेताओं को नालायक बताया था, तो इससे पहले पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत को जेल जाने से बचाने का दावा किया था. माना जा रहा है सत्याल को हटाकर सरकार ने हरक के तेवर ठंडे करने की कोशिश की है.