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देहरादून, 12 अक्टूबर 2021

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से करीब पांच महीने पहले राज्य दलबदल की राजनीति का अखाड़ा बन गया है. इसी के मद्देनज़र पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि विरोधी पार्टी के कई नेता कांग्रेस में आने के इच्छुक हैं, लेकिन माफी मांगे बगैर उनके लिए पार्टी के दरवाज़े नहीं खुलेंगे. दल बदलने वाले नेताओं को रावत ने ‘महापापी’ करार देते हुए यह भी दावा किया कि वह दलबदल की राजनीति के पक्ष में नहीं हैं. इधर, यशपाल आर्य के कांग्रेस जॉइन करने के बाद आए रावत के इस बयान के बाद भाजपा ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि रावत मनगढ़ंत बातें कर रहे हैं.

राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार में मंत्री यशपाल आर्य और नैनीताल से विधायक उनके बेटे संजीव आर्य ने सोमवार को ही कांग्रेस का दामन थामा. इससे पहले पिछले एक महीने के दौरान एक कांग्रेस विधायक समेत तीन विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं. दलबदल की इस राजनीति के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने न्यूज़18 के साथ बातचीत करते हुए कहा, ‘जिन लोगों की वजह से 2017 में कांग्रेस सरकार के गिरने की स्थिति बनी, वो अब वापस आना चाहते हैं, तो उन्हें अपना ‘पाप’ स्वीकार करना होगा.’

‘कोर भाजपा के कई विधायक आना चाहते हैं’

हरीश रावत ने कहा कि संसद हो या विधानसभा, दलबदल किसी भी सदन के लिए पाप जैसा होता है. ‘अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे महापाप कहा था. 2016 और 2017 में दलबदल जिस तरह हुआ, उसे मैं उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में कलंक मानता हूं. अब ऐसे महापापी कांग्रेस में आना चाहते हैं तो उन्हें पाप स्वीकार करके ही आना पड़ेगा.’

इसके बाद भाजपा के और नेताओं के पार्टी बदलने की संभावना को लेकर रावत ने आगे कहा, ‘वो तो मैं दलबदल के पक्ष में नहीं हूं, वरना भाजपा के कोर सेक्टर के कई विधायक कांग्रेस में आना चाहते हैं. इस सरकार ने पिछले पांच साल में उत्तराखंड की दशा खराब कर दी है. अब तो स्थिति यह है कि भाजपा के विधायक भाजपा के नाम पर खड़े ही नहीं हो पाएंगे.’

भाजपा ने कहा, दावे में कोई दम नहीं
इधर, हरीश रावत के इस बयान के बाद उत्तराखंड भाजपा ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि भाजपा का कोई विधायक पार्टी नहीं छोड़ेगा. उत्तराखंड सरकार के मंत्री गणेश जोशी, बिशन सिंह चुफाल जैसे नेताओं ने रावत के इस बयान पर कहा कि रावत लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे भी उन्हें अपना घर यानी कांग्रेस के हालात की चिंता करनी चाहिए.