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लखनऊ, 18 सितम्बर 2021

बिजली दरें कम करने की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा पावर कारपोरेशन से जवाब मांगे जाने के बाद उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसके लिए लामबंदी शुरू कर दी है। शनिवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर परिषद ने लोक महत्व का प्रस्ताव सौंपा। मांग की कि सरकार बिजली दरें कम कराने में सहयोग करे। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री को बताया कि सस्ती बिजली पाने का अधिकार राज्य के उपभोक्ताओं का बनता है। उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 20596 करोड़ रुपये निकल रहा है इसके एवज में बिजली दरें कम करने की मांग की जा रही है। बिजली दरें कम कर बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के इस कर्ज से मुक्त हो जाएंगी।

उन्होंने कहा कि नियामक आयोग ने परिषद की याचिका पर पावर कारपोरेशन से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। पावर कारपोरेशन जवाब देने में कोई अड़ंगा ना लगाए इसके लिए वह पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को निर्देशित करें। यूपी सरकार विद्युत अधिनियम 2003  की धारा 108 में लोक महत्व का विषय मानते हुए विद्युत नियामक आयोग को भी बिजली दरें कम करने के लिए अपना अभिमत दे ताकि राज्य की जनता को राहत मिल सके।

ऊर्जा मंत्री को यह भी बताया कि मंहगी बिजली खरीद पर रोक लगाकर, लाइन हानियां कम करके तथा फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर पावर कारपोरेशन अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है। ऐसा कर कारपोरेशन हर साल 3000 करोड़ से अधिक की बचत कर सकता है। ऊर्जा मंत्री ने परिषद के प्रस्ताव को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को भेजा। अवधेश वर्मा के मुताबिक उन्होंने प्रस्ताव पर लिखा है कि उपभोक्ता हित में कार्यवाही किया जाए।