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लखनऊ, 12 अगस्त 2021

किराएदार और मकान मालिक के बीच चलने वाले विवाद को खत्म करने के लिए हाल में बनाए गए कानून को अमली जामा पहनाने की तैयारी शुरू हो गई है। गोरखपुर में जल्द ही एडीएम स्तर का रेंट कंट्रोल अफसर (आरसीओ) की तैनाती होने जा रही है।

आरसीओ की तैनाती के बाद सभी तरह के किराएदारी के विवाद इसी कार्यालय द्वारा सुलझाए जाएंगे। इस कानून की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अकेले गोरखपुर में ही इस तरह के 2000 से ज्यादा मामले में कोर्ट में चल रहे हैं। इस तरह के विवाद कभी-कभी मारपीट और यहां तक तक की खून-खराबे तक आ जाती है। जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि इस व्यवस्था से किराएदारी के विवाद आसानी से सुलझ जाएंगे और भविष्य में विवाद होने की आशंका भी कम हो जाएगी। इसके जल्द ही नोडल अफसर नामित हो जाएंगे।

60 दिन में हो जाएगा निस्तारण

आरसीओ द्वारा किराएदारी विवाद संबंधी मामलों का निस्तारण 60 दिनों में किया जाएगा। इस कानून से न तो किराएदार मकान पर जबरिया कब्जा कर सकेंगे और न ही मकान मालिक एग्रीमेंट के खिलाफ मनमाने तरीके से किराएदार को अचानक से निकाल सकेंगे। एग्रीमेंट के मुताबिक किराएदार को तय समय पर मकान मालिक के कहने पर प्रापर्टी को खाली करना होगा और मकान मालिक को प्रापर्टी को खाली कराने से पहले नोटिस देना होगा। प्रदेश में नगरीय परिसर किरायेदारी विनयमन (द्वितीय) अध्यादेश-2021 लागू होने के बाद गोरखपुर में इसको लेकर जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। इस कानून में किराएदार और मकान मालिक का दायित्व तय किया गया है।

आपसी समझौता आरसीओ कार्यालय में होगा पंजीकृत

किराएदार और मकान मालिक के बीच किराएदारी को लेकर जो समझौता या एग्रीमेंट होगा उसे आरसीओ कार्यालय में पंजीकृत कराना होगा। बाद में कोई भी पक्ष समझौते का उल्लघंन करता है तो उसे आरसीओ कार्यालय में चुनौती दी जा सकेगी। समझौते का उल्लंघन करने वाले पक्ष को आरसीओ नोटिस जारी करेगा और तय समय के अंदर विवार को निस्तारित कराएगा।