इलाहाबाद हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को पेश हुए प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने आश्वासन दिया कि विभागों के सचिवों के साथ बैठकर हल निकालेंगे। कोर्ट में जवाब व मांगी जानकारी देने के लिए हर विभाग में नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से 24 जनवरी अगली सुनवाई तक उठाए गए कदमों की हलफनामे में जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय में स्टाफ की कमी एवं विभागों से मांगी गई जानकारी या जवाब समय से न आने से सुनवाई टलने पर मुख्य सचिव को तलब किया था। मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ ने ध्रुव राज बरनवाल व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। महाधिवक्ता कार्यालय में आग लगने को मुख्य सचिव ने एक्ट ऑफ गॉड बताया तो कोर्ट ने असहमति व्यक्त करते हुए ऑटोमेटिक फायर फाइटर संयंत्र के रखरखाव न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आदेश दिया।
मुख्य सचिव ने कार्यप्रणाली में आये बदलाव को देखते हुए तकनीकी के जरिये समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया। खंडपीठ ने मुख्य सचिव को मुकदमों की फाइलें कोर्ट में न आने, कोर्ट के आदेशों के बावजूद केसों में जवाबी हलफनामा दाखिल न होने, सरकारी वकीलों के फोन काल अधिकारियों द्वारा रिसीव न करने, जरूरी इंस्ट्रक्शन (जानकारी) कोर्ट में न देने पर बुलाया था। कोर्ट ने कहा कि मामले बहुत छोटे-छोटे हैं, लेकिन व्यवस्था पंगु है। इस वजह से केस लंबित पड़े हुए हैं।




