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US कॉमर्स मिनिस्टर के बयान से बढ़ी धड़कनें, एक्सपोर्ट कारोबार पर संकट, जानिए क्यों टेंशन में हैं भारत के एक्सपोर्टर्स ?

US कॉमर्स मिनिस्टर के बयान से बढ़ी धड़कनें, एक्सपोर्ट कारोबार पर संकट, जानिए क्यों टेंशन में हैं भारत के एक्सपोर्टर्स ?

भारत–अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक के हालिया बयान के बाद यह आशंका गहराने लगी है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाएगी। इस बयान का सीधा असर भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर की भावनाओं पर पड़ा है, जहां कारोबारी भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।

बयान से क्यों बढ़ी चिंता?

हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार होने के बावजूद इसलिए फाइनल नहीं हो सकी, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो पाई। इस बयान को एक्सपोर्टर्स ने महज़ कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि डील के ठप पड़ने का संकेत माना है।

टैरिफ का डर और बढ़ा

इस बीच अमेरिका में रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त टैरिफ लगाने की चर्चा भी तेज है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ऐसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत भी इस दायरे में आता है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अगर टैरिफ बढ़ते हैं, तो भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा और प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।

पहले से दबाव में है एक्सपोर्ट सेक्टर

निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका पहले ही कई भारतीय उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगा चुका है। इसका असर टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा जैसे सेक्टर्स पर पड़ा है। यदि ट्रेड डील नहीं होती या टैरिफ और बढ़ते हैं, तो इससे भारत के निर्यात और रोजगार दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अमेरिका क्यों है भारत के लिए अहम?

भले ही भारत नए बाजारों की तलाश में है, लेकिन अमेरिका आज भी भारत का सबसे बड़ा और सबसे अहम एक्सपोर्ट मार्केट है। बड़ी मात्रा में भारतीय उत्पाद अमेरिका जाते हैं। निर्यातकों का मानना है कि एक स्थिर और संतुलित ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों को फायदा होगा और कारोबारी अनिश्चितता कम होगी।

एक्सपोर्टर्स की मांग क्या?

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) का कहना है कि भारत और अमेरिका को बयानबाज़ी के बजाय सीधी और गंभीर बातचीत करनी चाहिए। संगठन के अध्यक्ष एससी रल्हन के मुताबिक, ट्रेड डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इसे टालने से दोनों पक्षों को नुकसान होगा।

थिंक टैंक का नजरिया

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का मानना है कि ट्रेड डील में देरी को सिर्फ कूटनीतिक संवाद से जोड़ना सही नहीं है। GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के अनुसार, असली मुद्दा नीतिगत मतभेद हैं—जिन्हें सुलझाए बिना डील संभव नहीं। उनका कहना है कि भारत–अमेरिका व्यापारिक रिश्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे अहम संबंधों में से एक है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, US कॉमर्स मिनिस्टर के बयान ने भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर की बेचैनी बढ़ा दी है। ट्रेड डील पर संशय, टैरिफ का खतरा और वैश्विक अनिश्चितता—इन सबके बीच भारतीय निर्यातक यही चाहते हैं कि दोनों देश बातचीत के रास्ते पर लौटें, ताकि कारोबार को स्थिरता मिल सके और लंबे समय तक चलने वाला समाधान निकले।

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