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UPI के जरिये छह साल में 48 करोड़ प्रतिमाह से 9.60 लाख करोड़ पहुंचा डिजिटल ट्रांजेक्शन, पीएम मोदी ने की तारीफ

UPI के जरिये छह साल में 48 करोड़ प्रतिमाह से 9.60 लाख करोड़ पहुंचा डिजिटल ट्रांजेक्शन, पीएम मोदी ने की तारीफ

नई दिल्ली। देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन (Digital Transaction) बढ़कर 9.60 लाख करोड़ रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि लगातार बढ़ रहे यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शंस के कारण हासिल हुई है। एक निजी कंपनी ने 2016 से मार्च 2022 के बीच यूपीआई ट्रांजेक्शन में हुई वृद्धि की जानकारी देते हुए प्रेजेंटेशन दिया है। उसने डेटा सोनिफिकेशन (Date Sonification) तकनीक के जरिये डिजिटल ट्रांजेक्शन की वृद्धि को दर्शाते हुए म्यूजिक क्रियेट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस प्रेजेंटेशन की तारीफ की है।

इस प्रेजेंटेशन के मुताबिक 2016 में 48 करोड़ प्रतिमाह था डिजिटल ट्रांजेक्शन, मार्च 2022 में बढ़कर 9.60 लाख करोड़ पहुंचा। पीएम मोदी ने प्रेजेंटेशन को रीट्वीट करते हुए लिखा –  मैंने अक्सर यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के बारे में बात की है, लेकिन आपने जिस तरह प्रभावी ढंग से अपनी बात को त्यक्त करने के लिए डेटा सोनिफिकेशन का इस्तेमाल किया, वह वास्तव में मुझे बहुत पसंद आया। बहुत ही रोचक, प्रभावशाली और स्पष्ट जानकारी।

जानें, माह हो रहा कितना यूपीआई पेमेंट 
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2016 में 48 करोड़ रुपए प्रतिमाह यूपीआई के जरिये पेमेंट हो रहा था। लेकिन नोटबंदी के बाद से इसमें लगातार वृद्धि शुरू हुई। नवंबर 2016 में नोटबंदी हुई, जिसके बाद यह बढ़कर 100 करोड़ पर पहुंच गया। एक महीने में ही इसमें सात गुना की वृद्धि हुई और दिसंबर 2016 में यूपीआई पेमेंट 707 करोड़ पर पहुंच गया। यूपीआई की रफ्तार यहीं नहीं थमी। जनवरी 2017 में यह बढ़कर प्रतिमाह 1,696 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो कि अप्रत्याशित था।

गूगल पे, भीम के आते ही बढ़ने लगे ट्रांजेक्शंस
यूपीआई पेमेंट की रफ्तार इसी तरह बढ़ती गई और गूगल पे (Google pay) के साथ ही भारत सरकार ने भीम (BHIM) ऐप लॉन्च किया। इसके साथ ही मार्च 2017 तक यूपीआई ट्रांजेक्शन 2,425 करोड़ रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गया। प्रधानमंत्री मोदी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसके मुताबिक अप्रैल 2017 में यूपीआई की रफ्तार थोड़ी कम हुई और यह करीब 200 करोड़ प्रतिमाह तक कम हुआ, लेकिन अगले ही महीने इसमें फिर उछाल हुई और यूपीआई ट्रांजेक्शन बढ़ते हुए 2,797 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

एक साल में 13 हजार करोड़ तक पहुंच डिजिटल पेमेंट
दिसंबर 2017 आते-आते देश में यूपीआई ट्रांजेक्शन 13,174 करोड़ रुपए की ऊंचाई को छू गया। एक साल में डिजिटल ट्रांजेक्शन की ऐसी रफ्तार प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन के तहत बिल्कुल सही तेजी में थी। मार्च 2018 तक इसमें दोगुनी तक वृद्धि हुई और यह 24 हजार करोड़ की ऊंचाई पर पहुंच गया।

पहले लॉकडाउन में कमी हुई, लेकिन दो माह में ही भरपाई
2019 में दुनियाभर में कोविड 19 (Covid 19) महामारी की शुरुआत हो चुकी थी, तब भी भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन 2.02 लाख करोड़ रुपए पर था। फरवरी 2020 तक इसमें लगातार वृद्धि हुई, लेकिन मार्च 2020 में लॉकडाउन शुरू होते ही इसमें गिरावट दर्ज की गई और अप्रैल 2020 तक घटकर 1.51 लाख करोड़ पर आ गया। कारोबार, दुकानें, बाजार सब कुछ बंद था, इसलिए इसमें गिरावट आना स्वाभाविक था। उसके बाद भी यूपीआई पेमेंट काम करता रहा। मई 2020 से एक बार फिर इसमें वृद्धि शुरू हुई और जून आते-आते यह 2.61 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। दिसंबर 2020 में महामारी के दौरान भी यह बढ़कर 4.16 लाख करोड़ रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गया। मार्च 2022 में यह 9.60 लाख करोड़ प्रतिमाह पर है। इसकी रफ्तार अभी भी जारी है।

अब इतनी कंपनियां चला रहीं यूपीआई पेमेंट
नोटबंदी के समय सिर्फ पेटीएम (PayTM) ही डिजिटल ट्रांजेक्शन का जरिया थी, लेकिन वर्तमान में कई कंपनियां यह सुविधा मुहैया करा रही हैं। गूगल, फोन पे, भीम यूपीआई, एयरटेल, एमआई और वॉट्सऐप जैसी मैसेजिंग कंपनी भी यूपीआई और डिजिटल ट्रांजेक्शंस के फीचर मुहैया करा रही हैं। पहले यूजर के पास जिस कंपनी का यूपीआई होता था, उसी के जरिये पेमेंट होता था। लेकिन, पेटीएम ने इस समस्या का भी समाधान कर दिया है। अब इन कंपनियों के बार कोड स्कैन कर किसी भी ऐप के जरिये पेमेंट किया जा सकता है।

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