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UP SIR: अखिलेश यादव के आरोपों के बीच चिल्लावां गांव में BLO के पास पहुंचे वोट काटने के फॉर्म, जांच में सभी मतदाता मिले जीवित, पूरा मामला

UP SIR: अखिलेश यादव के आरोपों के बीच चिल्लावां गांव में BLO के पास पहुंचे वोट काटने के फॉर्म, जांच में सभी मतदाता मिले जीवित, पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 के जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम जानबूझकर कटवाए जा रहे हैं। उनके दावे के बाद एबीपी न्यूज़ की टीम जब ग्राउंड पर पहुंची, तो लखनऊ की सरोजिनी नगर विधानसभा के चिल्लावां गांव से ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने इस पूरे मामले पर नए सवाल खड़े कर दिए।

फॉर्म-7 को लेकर क्या है आरोप?
अखिलेश यादव का कहना है कि SIR प्रक्रिया में फॉर्म-7 का दुरुपयोग हो रहा है और भाजपा से जुड़े लोग उनके समर्थक मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए ये फॉर्म जमा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि चिल्लावां गांव में एक व्यक्ति ने 100 से ज्यादा फॉर्म भरकर वोट कटवाने की कोशिश की।

ग्राउंड रिपोर्ट में क्या मिला?
चिल्लावां प्राथमिक विद्यालय में न्यूज़ की टीम को तीन बूथों के लिए तैनात तीन बीएलओ (BLO) मिले। तीनों ने बताया कि उनके पास मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म आए थे। एक बीएलओ ने 127, दूसरे ने 27 और तीसरे ने करीब 40–50 फॉर्म मिलने की पुष्टि की। जांच में पता चला कि जिन लोगों के नाम काटने के आवेदन थे, वे सभी जीवित हैं, पास-पड़ोस में रहते हैं और उसी बूथ के मतदाता हैं। इसके बाद बीएलओ ने इन फॉर्म्स को आगे नहीं बढ़ाया।

मतदाता क्या बोले?
जिन मतदाताओं के नाम काटने के आवेदन किए गए थे, वे मौके पर मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि उनके नाम से फॉर्म एक व्यक्ति—दशरथ कुमार/दशरथ यादव—द्वारा जमा किए गए थे, जबकि उन्होंने स्वयं ऐसा कोई आवेदन नहीं किया। मतदाताओं ने इसे गलत और साजिश बताया और कहा कि उन्हें अनुपस्थित दिखाकर नाम कटवाने की कोशिश हो रही है।

आरोपी व्यक्ति की सफाई
एबीपी न्यूज़ की टीम आरोपित दशरथ कुमार के घर भी पहुंची। पूछताछ में उन्होंने कहा कि उन्हें बीएलओ से फॉर्म मिले थे और उन्होंने वही जमा किए। उनका कहना था कि जांच बीएलओ अपने स्तर पर करें।

बीएलओ का पलटवार
गांव के लोगों के बुलाने पर बीएलओ भी मौके पर पहुंचे। बीएलओ का आरोप था कि उन पर नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है और इसके सबूत उनके पास हैं—ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित। अन्य बीएलओ ने भी कहा कि फॉर्म दशरथ कुमार ने ही जमा किए थे। वहीं, दशरथ कुमार का दावा रहा कि बीएलओ ने कुछ नामों को “डाउटफुल” बताया और साइन करने को कहा।
ग्राउंड रिपोर्ट से यह साफ होता है कि फॉर्म-7 के जरिए नाम कटवाने की कोशिशें हुईं, लेकिन मौके पर जांच के बाद उन्हें आगे नहीं बढ़ाया गया। सवाल यह है कि फॉर्म किसके कहने पर और किस उद्देश्य से भरे गए। मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी का भी है—जिस पर चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका निर्णायक होगी।

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