टिकट खरीदकर मोदी ने की ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम’ में एंट्री, संग्रहालय में जितना अतीत है, उतना ही भविष्य भी

टिकट खरीदकर मोदी ने की ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम’ में एंट्री, संग्रहालय में जितना अतीत है, उतना ही भविष्य भी

नई दिल्ली. आप भारत के अब तक हुए प्रधानमंत्रियों के बारे में कितना जानते हैं? अपना नॉलेज और बढ़ाना चाहते हैं, तो एक नया संग्रहालय आपकी इसमें मदद करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने आज प्रधानमंत्री संग्रहालय (Prime Minister Museum) का उद्घाटन किया। यह आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव(azadi ka amrit mahotsav) के दौरान किया गया। सरकार का कहना है कि यह म्यूजियम देश के सभी प्रधानमंत्रियों के बारे में लोगों के बीच जागरुकता लाएगा। यानी देशवासी उनके विजन से रूबरू हो सकेंगे। मोदी ने उद्घाटन से पहले म्यूजियम का टिकट खरीदा।

ये संग्रहालय प्रत्येक सरकार की साझा विरासत
इस मौके पर मोदी ने कहा-ऐसे समय में जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तब ये म्यूजियम, एक भव्य प्रेरणा बनकर आया है। इन 75 वर्षों में देश ने अनेक गौरवमय पल देखे हैं। इतिहास के झरोखे में इन पलों का जो महत्व है, वो अतुलनीय है। देश आज जिस ऊंचाई पर है, वहां तक उसे पहुंचाने में स्वतंत्र भारत के बाद बनी प्रत्येक सरकार का योगदान है। मैंने लाल किले से भी ये बात कई बार दोहराई है। आज ये संग्रहालय भी प्रत्येक सरकार की साझा विरासत का जीवंत प्रतिबिंब बन गया है। आज बैसाखी, बिहू है, आज से ओडिया नववर्ष भी शुरू हो रहा है। हमारे तमिलनाडु भाई-बहन भी नए वर्ष का स्वागत कर रहे है। इसके अलावा भी कई क्षेत्रों में नव वर्ष शुरू हो रहा है, अनेक पर्व मनाए जा रहे हैं। मैं देशवासियों को सभी पर्वों की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

देश के आगे ले जाने की कोशिश
देश के हर प्रधानमंत्री ने अपने समय की अलग-अलग चुनौतियों को पार करते हुए देश को आगे ले जाने की कोशिश की है। सबके व्यक्तित्व, कृतित्व, नेतृत्व के अलग-अलग आयाम रहे हैं। देश की जनता, विशेषकर युवा वर्ग, भावी पीढ़ी सभी प्रधानमंत्रियों के बारे में जानेगी तो उन्हें प्रेरणा मिलेगी। देश के हर प्रधानमंत्री ने संविधान सम्मत लोकतंत्र के लक्ष्यों की पूर्ति में भरसक योगदान दिया है। उन्हें स्मरण करना स्वतंत्र भारत की यात्रा को जानना है। यहां आने वाले लोग देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान से रूबरू होंगे, उनके संघर्ष-सृजन को जानेंगे।

संग्रहालय अतीत भी है और भविष्य भी
इस संग्रहालय में जितना अतीत है, उतना ही भविष्य भी है। ये संग्रहालय देश के लोगों को बीते समय की यात्रा करवाते हुए, नई दिशा-नए रूप में भारत की विकास यात्रा पर ले जाएगा। ये हम भारतवासियों के लिए बहुत गौरव की बात है कि हमारे ज्यादातर प्रधानमंत्री बहुत ही साधारण परिवार से रहे हैं। सुदूर देहात से आकर, एकदम गरीब परिवार से आकर, किसान परिवार से आकर भी प्रधानमंत्री पद पर पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की महान परंपराओं के प्रति विश्वास को दृढ़ करता है। भारत, लोकतंत्र की जननी है, Mother of Democracy है। भारत के लोकतंत्र की बड़ी विशेषता ये भी है कि समय के साथ इसमें निरंतर बदलाव आता रहा है। हर युग में, हर पीढ़ी में, लोकतंत्र को और आधुनिक बनाने, सशक्त करने का निरंतर प्रयास हुआ है।

एक दो अपवाद छोड़ दें तो…
मोदी ने कहा-एक दो अपवाद छोड़ दें तो हमारे यहां लोकतंत्र को लोकतांत्रिक तरीके से मजबूत करने की गौरवशाली परंपरा रही है। इसलिए हमारा भी ये दायित्व है कि अपने प्रयासों से लोकतंत्र को मजबूत करते रहें। हम तो उस सभ्यता से हैं जिसमें कहा जाता है-
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः
यानि हर तरफ से नेक विचार हमारे पास आएं!

लोकतंत्र हमें प्रेरणा देता है
हमारा लोकतंत्र हमें प्रेरणा देता है, नवीनता को स्वीकारने की, नए विचारों को स्वीकारने की।ये हमारी सरकार का सौभाग्य है कि दिल्ली में हमने बाबा साहेब की महापरिनिर्वाण स्थली, अलीपुर रोड पर बाबा साहेब मेमोरियल का निर्माण करवाया। बाबा साहेब के जो पंच तीर्थ विकसित किए गए हैं, वो सामाजिक न्याय और अटूट राष्ट्र निष्ठा के लिए प्रेरणा के केंद्र हैं।

म्यूजियम में 43 गैलरी हैं
संग्रहालय में 43 गैलरी हैं। इन के जरिये स्वतंत्रता संग्राम के प्रदर्शन से शुरू होकर संविधान के निर्माण तक की कहानियां प्रदर्शित की गई हैं कि कैसे देश के प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न चुनौतियों के बावजूद देश को नई राह दी, सर्वांगीण प्रगति की दिशा में काम किया। पुराने और नए के संग्रहालय ब्लॉक I के रूप में पहचाने जाने वाले तत्कालीन तीन मूर्ति भवन को ब्लॉक II के रूप में पहचान रखने वाले नवनिर्मित भवन के साथ जोड़ा गया है। दो ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल 15,600 वर्ग मीटर से अधिक है। इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक अनूठी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री संग्रहालय स्वतंत्रता के बाद से भारत के प्रत्येक प्रधानमंत्री की विचारधारा अथवा कार्यकाल के अलावा देश के प्रति उनके योगदानों के लिए एक श्रद्धांजलि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे एक सम्मिलित प्रयास बताया है। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को सभी प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व, दूरदृष्टि और उपलब्धियों के प्रति संवेदनशील बनाना और प्रेरणा देना है।

यह भी जानें
संग्रहालय के भवन का डिजाइन नए भारत की कहानी से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया है। डिजाइन में दीर्घकालिक और ऊर्जा संरक्षण से जुड़ी तकनीक को भी शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए किसी भी पेड़ को काटा नहीं गया। वे जहां हैं, वहीं मौजूद हैं। संग्रहालय का लोगो राष्ट्र और लोकतंत्र के प्रतीक धर्म चक्र को धारण करने वाले भारत के लोगों के हाथों का प्रतिनिधित्व करता है।

ऐसे तैयार हुआ संग्रहालय
संग्रहालय के लिए जानकारियों को प्रसार भारती, दूरदर्शन, फिल्म प्रभाग, संसद टीवी, रक्षा मंत्रालय, मीडिया हाउस (भारतीय और विदेशी), विदेशी समाचार एजेंसियों आदि जैसे संस्थानों के संसाधनों/संग्राहकों की मदद से जुटाया गया है। इनमें प्रधानमंत्रियों के साहित्यिक कार्य, महत्वपूर्ण पत्राचार, कुछ व्यक्तिगत वस्तुएं, उपहार और यादगार वस्तुएं (सम्मान पत्रों, सम्मान, प्रदान किए गए पदक, स्मारक टिकट, सिक्के, आदि), प्रधानमंत्रियों के भाषण और उनकी विचारधाराओं से जुड़े दस्तावेज आदि रखे गए हैं।

 

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