नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इन कर्मचारियों पर आतंकियों से संबंध रखने और उन्हें मदद पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे थे। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में एक पुलिस कांस्टेबल, एक शिक्षक और एक अर्दली शामिल हैं।
सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद लिया गया बड़ा फैसला
यह कार्रवाई सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद की गई, जिसमें उपराज्यपाल के साथ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद तत्काल प्रभाव से तीनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया।
बर्खास्त कर्मचारियों की पहचान
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की पहचान फिरदौस भट्ट, निसार अहमद खान और अशरफ भट के रूप में हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस का कांस्टेबल फिरदौस भट्ट विभाग में रहकर आतंकियों को खुफिया जानकारी देता था। वहीं, शिक्षक निसार अहमद खान और अर्दली अशरफ भट पर आतंकवादियों की सहायता करने के आरोप हैं।
आतंकियों की मदद करने वालों को नहीं मिलेगी राहत
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहले भी साफ कर दिया था कि जो भी आतंकियों को समर्थन देगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
मनोज सिन्हा ने सुरक्षा बलों को खुली छूट दी है कि वे आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करें। उन्होंने दोहराया कि जो भी आतंकियों को अपने घर में शरण देगा, उसका घर ध्वस्त कर दिया जाएगा।
षड्यंत्र करने वालों पर कड़ी नजर
हाल ही में श्रीनगर में हुए ग्रेनेड हमले का जिक्र करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि कुछ लोग शांति भंग करने की साजिश में लगे हैं। उन्होंने बाहरी ताकतों के साथ-साथ स्थानीय षड्यंत्रकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया, जो घाटी में हिंसा को बढ़ावा देते हैं।
सरकार के इस कड़े कदम से साफ हो गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को किसी भी रूप में सहन नहीं किया जाएगा, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।




