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पंजाब में मंदिर पर हमला, सात महीने की जांच और अब NIA की रेड, जानिए पूरा मामला

पंजाब में मंदिर पर हमला, सात महीने की जांच और अब NIA की रेड, जानिए पूरा मामला

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पंजाब के बॉर्डर इलाकों में एक बड़ी और समन्वित कार्रवाई को अंजाम दिया है। एजेंसी ने अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों में कुल 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई वर्ष 2025 में अमृतसर के एक मंदिर पर हुए ग्रेनेड हमले से जुड़ी जांच को आगे बढ़ाने के लिए की गई है। NIA के अनुसार, यह सर्च ऑपरेशन गुरुवार यानी 22 जनवरी को चलाया गया।


छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ

NIA की टीमों ने छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। इसमें कई मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस, सिम कार्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच के बाद आतंकी साजिश से जुड़े नेटवर्क की और परतें खुल सकती हैं। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमले के पीछे विदेशों से संचालित किन-किन लोगों का हाथ था।


14 मार्च 2025 की रात क्या हुआ था

पूरा मामला 14 मार्च 2025 की रात का है। उस रात अमृतसर के शेरशाह रोड, खांडवाला इलाके में स्थित ठाकुर सनातन मंदिर के बाहर जोरदार धमाका हुआ था। शुरुआत में इसे सामान्य विस्फोट माना गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर साफ हो गया कि यह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ग्रेनेड हमला था। इस हमले से इलाके में दहशत फैल गई थी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर आ गई थीं।


आतंक फैलाने की साजिश और विदेशी कनेक्शन

NIA की जांच में यह सामने आया कि मंदिर पर किया गया ग्रेनेड हमला पंजाब में आतंक का माहौल बनाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस हमले की योजना विदेशों में बैठे हैंडलरों ने बनाई थी। ये हैंडलर भारत में अपने नेटवर्क के जरिए लोगों को भर्ती करने और उन्हें फंडिंग उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। एजेंसी अब इसी विदेशी आतंकी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।


ग्रेनेड फेंकने वाले कौन थे

जांच में सामने आया कि मंदिर पर ग्रेनेड फेंकने की वारदात विशाल और गुरसिदक नाम के दो लोगों ने की थी। इनमें से विशाल फिलहाल NIA की गिरफ्त में है, जबकि दूसरा आरोपी गुरसिदक अब जीवित नहीं है। पूछताछ में यह भी पता चला कि दोनों को हमले में इस्तेमाल की गई विस्फोटक सामग्री स्थानीय स्तर पर मुहैया कराई गई थी।


शरणजीत कुमार की भूमिका

NIA के अनुसार, विस्फोटक सामग्री बटाला के कादियां निवासी शरणजीत कुमार ने उपलब्ध कराई थी। घटना के बाद शरणजीत फरार होकर झारखंड और बिहार चला गया था। लंबे समय तक चली तलाश के बाद NIA ने उसे सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर गुरदासपुर जिले से तीन हैंड ग्रेनेड और एक पिस्तौल भी बरामद की गई थी, जिसने इस मामले को और गंभीर बना दिया।


NIA की आगे की रणनीति

NIA ने साफ किया है कि विदेशों से संचालित आतंकी मॉड्यूल को जड़ से खत्म करने के लिए एजेंसी की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। एजेंसी का कहना है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


पंजाब सरकार का समानांतर अभियान

गौरतलब है कि NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पंजाब सरकार भी अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे “ऑपरेशन प्रहार” के तहत भी अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कसा जा रहा है। ऐसे में NIA की यह छापेमारी सुरक्षा एजेंसियों के साझा प्रयासों की कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

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