द फ्रंट डेस्क: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आया एक मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है। एक मेडिकल छात्रा, जो डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का सपना देख रही थी, उसकी लाश उसकी ही कार में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मौत से पहले छात्रा ने अपने पिता से लंबी बातचीत में मानसिक तनाव और कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब परिवार का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का नतीजा है।
क्या है पूरा मामला
मृतका तन्वी देहरादून के श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज में नेत्र विज्ञान (एमएस) की पढ़ाई कर रही थी। वह पढ़ाई में अच्छी थी और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। लेकिन बीते कुछ समय से वह मानसिक दबाव में थी। बताया जा रहा है कि मौत से एक दिन पहले तन्वी ने अपने पिता डॉ. ललित मोहन से करीब एक घंटे तक फोन पर बात की थी। इस दौरान उसने कॉलेज की प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाए। उसने बताया कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और फेल करने की धमकी दी जा रही है। पिता ने उसे भरोसा दिलाया कि वे अगले दिन देहरादून आकर इस मामले को सुलझाएंगे और उससे कहा कि वह हिम्मत न हारे।
मां को भेजा आखिरी मैसेज, फिर बंद हो गया फोन
घटना वाली रात करीब 11:15 बजे तन्वी ने अपनी मां को मैसेज कर बताया कि वह देर से घर पहुंचेगी। यह उसका आखिरी मैसेज था। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। जब देर रात तक परिवार उससे संपर्क नहीं कर पाया, तो चिंता बढ़ गई। पिता ने बिना समय गंवाए अंबाला से देहरादून के लिए रवाना होने का फैसला किया। पूरी रात की यात्रा के बाद वह तड़के करीब तीन बजे देहरादून पहुंचे और सीधे बेटी की तलाश में निकल पड़े।
सड़क किनारे खड़ी कार में मिला शव
देहरादून पहुंचकर पिता ने सबसे पहले अस्पताल की पार्किंग में बेटी को ढूंढा, लेकिन वहां उसकी कार नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने शहर के अलग-अलग इलाकों में तलाश शुरू की। तलाश के दौरान वे काली माता मंदिर के पास एक पेट्रोल पंप के नजदीक पहुंचे। वहां सड़क किनारे एक कार खड़ी दिखी। पास जाकर देखा तो वह तन्वी की ही कार थी। कार के अंदर का दृश्य देखकर पिता के होश उड़ गए। तन्वी बेहोश हालत में पड़ी थी। घबराकर उन्होंने पत्थर से कार का शीशा तोड़ा और उसे बाहर निकाला। तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कार से बरामद हुए संदिग्ध सामान
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में कार से दवाएं, इंजेक्शन और एक कैनुला बरामद किया गया है। इन सभी चीजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में हर एंगल से जांच की जा रही है। छात्रा के फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और कॉलेज से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
परिवार का आरोप- सिस्टम ने ली बेटी की जान
मृतका के पिता डॉ. ललित मोहन ने इस पूरे मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह तनाव में थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी। उन्होंने उसकी पढ़ाई पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन सिस्टम के दबाव और अन्याय ने उनकी बेटी को उनसे छीन लिया। परिवार ने मांग की है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और छात्र या परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
जांच में जुटी पुलिस, रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस ने पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे वे अंबाला ले गए। अब इस पूरे मामले की सच्चाई फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगी। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला न केवल एक छात्रा की संदिग्ध मौत का है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या हमारे शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र मानसिक रूप से सुरक्षित हैं या नहीं।




