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नई दिल्ली, 21 मई 2021

देश के सर्वेच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उच्च न्यायालयों से कहा कि कोविड से संबंधित मामलों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को देखते हुए ऐसे आदेश पारित करने से बचना चाहिए जिन्हें लागू करना असंभव है। इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी जिसमें न्यायालय ने युद्ध स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने को कहा था। बीते 17 मई को यूपी में कोरोना मामलों की स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया था।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संकट के बीच कई उच्च न्यायालयों ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए स्थिति पर स्वत: संज्ञान लिया है। इसी क्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने का आदेश दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिस पर आज सुनवाई की गई। जस्टिस विनीत सरन और बीआर गवई की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘उच्च न्यायालयों को ऐसे आदेश पारित करने चाहिए जिन्हें लागू करना संभव हो।’

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें अदालत ने कहा था कि चार महीने के भीतर, उत्तर प्रदेश के सभी नर्सिंग होम बेड में ऑक्सीजन की सुविधा होनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था कि एक महीने के भीतर यूपी के हर गांव में आईसीयू सुविधा के साथ दो एंबुलेंस हों। यूपी सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अच्छी नीयत से दिया गया है, लेकिन इन्हें लागू करने में मुश्किल है।