जब दिग्गज कंपनी Supertech के खिलाफ आम लोगों ने छेड़ी जंग, 11 साल की लड़ाई के बाद आया सुप्रीम फैसला

जब दिग्गज कंपनी Supertech के खिलाफ आम लोगों ने छेड़ी जंग, 11 साल की लड़ाई के बाद आया सुप्रीम फैसला

Supertech Twin Towers Demolition Case: नोएडा (Noida) के सेक्टर 93 ए में सुपरटेक के ट्विन टावर (Supertech Twin Towers) 28 अगस्त को गिरा दिए जाएंगे. एपेक्स और सियान नाम के इन टावरों को गिराने के लिए सोसायटी में रहने वाले आम लोगों ने लंबी लड़ाई लड़ी है. पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court)  और फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इन टावरों को अवैध माना और उन्हें गिराने का आदेश दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ही ट्विन टावर को गिराने का आदेश जारी कर दिया था लेकिन इमारत के ध्वस्तिकरण की तैयारियां पूरी नहीं हो पाई थीं, इसलिए तारीख को बढ़ा दिया गया था. बताया जा रहा है कि फिलहाल इन टावर में विस्फोटक लगाने की तैयारियां जारी है और कल इन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा.

इमारत के ध्वस्तिकरण का यह मामला देश के इतिहास में मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि इसमें एक बड़े बिल्डर के खिलाफ कानूनी लड़ाई में आम लोग शामिल थे. चंदा करके लोगों ने यह केस लड़ा और जीता भी. इस लड़ाई को जीतने में एक दशक से ज्यादा का वक्त लग गया. आखिर क्यों आम लोगों ने इन टावर को गिराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, क्या है आखिर पूरा मामला, आइये विस्तार से जानते हैं.

पहले बताया ग्रीन जोन फिर बना दिए टावर

नोएडा की एमराल्ड कोर्ट सोसायटी में जिस जगह ट्विन टावर बनाए गए, उस स्थान को पहले ग्रीन जोन बताया गया था. सोसायटी में मकान खरीदने वालों के लिए भी जगह को ब्रॉशर में ग्रीन जोन बताकर प्रचारित किया गया था. एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष यूबीएस तेवतिया ने भी मीडिया को जानकारी दी कि मास्टर प्लान में एपेक्स और सियान टावर वाली जगह को ओपन स्पेस के तौर पर दिखाया गया था. सोसायटी में 660 परिवार रहते हैं. लोगों को धोखे में रख इन ट्विन टावर का निर्माण शुरू किया गया . इसके लिए नोएडा अथॉरिटी और टावर बनाने वाले सुपरटेक बिल्डर पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगा.

पहली बार सोसायटी के नक्शे में 2006 में बदलाव किया गया और एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के टावर नंबर 16-17 को उसमें जोड़ा गया. मार्च 2012 को 40 मंजिला दोनों टावर की ऊंचाई 121 मीटर निर्धारित की गई. नेशनल बिल्डिंग कोड नियम मुताबिक दोनों टावरों के बीच में 16 मीटर का फासला होना चाहिए था लेकिन यह दूरी 9 मीटर से भी कम रखी गई.

चंदा इकट्ठा कर लड़ा गया केस

सोसायटी में पहले से रह रहे लोगों के लिए इन टॉवरों से हवा और धूप की दिक्कत होने लगी. अदालत में यह केस लड़ने के लिए सोसायटी के 600 घरों से करीब 17 हजार रुपये का चंदा इकट्ठा किया गया. इन टावर के खिलाफ कानून लड़ाई लड़ने का मन 2009 में सोसायटी के लोगों ने बना लिया था लेकिन 2010 में रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के जरिये इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कराई गई.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2014 में ट्विन टावर को अवैध मानते हुए इन्हें गिराने का आदेश दिया, साथ ही नोएडा अथॉरिटी के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया.  11 अप्रैल 2014 में नोएडा अथॉरिटी ने दोनों टावर को तोड़ने का आदेश दिया. सुपरटेक ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. लोगों के लिए राहत की बात यह रही कि हाईकोर्ट के आदेश के प्रोजेक्ट पर स्टे लग गया था.

आम लोगों ने जीत ली कानूनी जंग

इन दो ट्विन टावर में 900 फ्लैट थे. सोसायटी के 15 टावर में पहले से करीब 600 परिवार रह रहे थे. लोगों का आरोप था कि अवैध रूप से बन रहे इन टावर के कारण सोसायटी के संसाधन पर बुरा असर पड़ा और जिंदगी चॉल में बिताने जैसी हो गई.

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को दोनों टावर को तीन महीने में गिराने का आदेश दे दिया लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने की वजह से यह नहीं हो पाया. 10 अप्रैल 2022 को ट्विन टावर में धमाके का परीक्षण किया गया. इसके बाद 21 अगस्त को टावर गिराने की तारीख तय हुई लेकिन एनओसी मिलने में देरी कारण अब इन्हें कल यानी 28 अगस्त को ध्वस्त किया जाएगा.

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