उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि अब वक्फ के नाम पर जमीनों की डकैती बंद होगी। उन्होंने कहा कि वर्षों से वक्फ बोर्ड की आड़ में की जा रही लूट अब रुक जाएगी और इन संपत्तियों का उपयोग राष्ट्र निर्माण में होगा — जैसे स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के निर्माण में।
योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को महाराजगंज जिले के रतनपुर में 654 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, “वक्फ बोर्ड के नाम पर अब कोई भी जमीन हड़प नहीं सकेगा। वर्षों से कुछ लोग इसे लूट का जरिया बनाए हुए थे। अब इस पर रोक लगेगी।”
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “देश की सार्वजनिक संपत्तियों पर कुछ गिने-चुने लोगों का कब्जा था। उत्तर प्रदेश में लाखों एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर कब्जाई गई थी। अब वह जमीन विकास कार्यों में प्रयोग होगी।”
योगी ने कहा कि वर्षों तक वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग हुआ, लेकिन अब उनका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के लिए मकान बनाने जैसे कार्यों में होगा। “अब न कोई वक्फ के नाम पर मनमानी करेगा, न कोई जमीन हड़पेगा,” उन्होंने दोहराया।
गौरतलब है कि संसद में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को दोनों सदनों से पास कर दिया गया है। लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े जबकि विरोध में 232 वोट पड़े। वहीं राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े।
हालांकि इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार की नजर अब चर्च की जमीनों पर भी है। उन्होंने कहा कि यह केवल वक्फ की बात नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक संपत्तियों को निशाना बनाने की साजिश है।
योगी आदित्यनाथ के बयान पर भी राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां भाजपा इसे ‘साहसिक और ऐतिहासिक फैसला’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश करार दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह भी जोड़ा कि जिन जमीनों पर आज तक विवाद और अवैध कब्जा था, अब वहां पर सरकार जनहितकारी योजनाएं चलाएगी। “यह नया भारत है, यहां अब लूट, कब्जा और मनमानी नहीं चलेगी,” उन्होंने कहा।
वक्फ संपत्तियों को लेकर यह अब तक का सबसे बड़ा कानूनी बदलाव माना जा रहा है, जिससे लाखों एकड़ जमीन सरकार के नियंत्रण में आ सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विधेयक के लागू होने के बाद जमीनों की मौजूदा स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ता है और किस तरह से इसका उपयोग जनकल्याण में होता है।
इस विधेयक के बाद जहां एक ओर सरकार इसे न्याय और विकास का कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है।




