SIR Hearing: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने खुद रखीं दलीलें, CJI को क्यों कहना पड़ा—“सिब्बल जैसे काबिल वकील हैं, उन्हें बोलने दीजिए”?, पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर बुधवार (4 फरवरी 2026) को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं और उन्होंने SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे अपनी दलीलें पेश करने की कोशिश की। इसी दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को यह कहना पड़ा कि कोर्ट में पहले से मौजूद वरिष्ठ और काबिल वकीलों को अपनी बात रखने दी जाए।

सुनवाई का बैकग्राउंड क्या है?

सुप्रीम कोर्ट देशभर में चल रहे मतदाता सूची के SIR के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में एक याचिका ममता बनर्जी की भी है। उन्होंने हाल ही में एक अतिरिक्त आवेदन दाखिल कर मांग की थी कि SIR के नाम पर वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

CJI ने क्यों टोका?

सुनवाई के दौरान जब ममता बनर्जी बार-बार खुद दलीलें रखने की बात कह रही थीं, तब CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट में कई अनुभवी और वरिष्ठ वकील मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से कपिल सिब्बल का नाम लेते हुए कहा कि वे पहले भी बंगाल की ओर से SIR से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रख चुके हैं, इसलिए उन्हें बोलने दिया जाना चाहिए।

CJI ने कहा कि 19 जनवरी को कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया था कि SIR की प्रक्रिया के चलते पश्चिम बंगाल में वास्तविक निवासियों के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि वह बंगाल से हैं और जमीनी हालात को सबसे बेहतर समझती हैं। उन्होंने कहा,

“जब बार-बार पत्र लिखने के बावजूद जवाब नहीं मिलता, तब लगता है कि न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया सिर्फ नाम मिटाने का जरिया बन गई है। ममता ने कहा कि अगर किसी बेटी ने शादी के बाद पति का सरनेम अपना लिया, तो उसे भी “नेम मिसमैच” बताकर सूची से बाहर किया जा रहा है।

BLO, माइक्रो ऑब्जर्वर और असम का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि—

  • कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर अत्यधिक दबाव है
  • माइक्रो ऑब्जर्वर को जरूरत से ज्यादा अधिकार दिए गए हैं
  • BLO प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रहे

साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि अगर SIR इतनी जरूरी प्रक्रिया है, तो इसे केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों लागू किया जा रहा है? असम जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया क्यों नहीं चलाई जा रही?

चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?

चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील राकेश द्विवेदी ने ममता बनर्जी के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के तहत की गई है। इस पर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है।

फिर CJI को क्यों हस्तक्षेप करना पड़ा?

जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के वकील की दलीलों पर दोबारा बोलने की कोशिश की, तो CJI सूर्यकांत ने उन्हें रोकते हुए कहा कि कोर्ट को एडवोकेट श्याम दीवान और अन्य वरिष्ठ वकीलों की क्षमता पर पूरा भरोसा है और वे कानूनी बिंदुओं को बेहतर तरीके से रख सकते हैं।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

सुनवाई के अंत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत समाधान निकालना चाहती है। उन्होंने ममता बनर्जी से निर्देश दिया कि—

  • अगली सुनवाई तक ग्रुप-B के उन अधिकारियों की सूची दी जाए
  • जिन्हें SIR प्रक्रिया में लगाया जा सकता है

इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

यह सुनवाई केवल SIR की तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें लोकतंत्र, मतदाता अधिकार और संघीय संतुलन जैसे बड़े सवाल भी उठे। एक तरफ ममता बनर्जी इसे बंगाल को निशाना बनाने की कोशिश बता रही हैं, तो दूसरी ओर कोर्ट यह संकेत दे रहा है कि समाधान संवाद और कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही निकलेगा।

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