Russia-Ukraine War: पढ़िए बमों और गोलियों के बीच सुमी से भारतीय छात्रों को निकालने की पूरी कहानी

Russia-Ukraine War: पढ़िए बमों और गोलियों के बीच सुमी से भारतीय छात्रों को निकालने की पूरी कहानी

नई दिल्ली, यूक्रेन और रूस के बीच हो रहे जंग के बीच सुमी से 700 भारतीय छात्रों को मंगलवार को 12 बसों के जरिए निकाला गया। जंग के हालात से भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो अलग-अलग फोन कॉल पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ सोमवार को बात हुई थी।

बता दें कि इस अभियान को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस को एक अधिकारी ने जानकारी दी कि “पीएम मोदी से हुई इस बातचीत में भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए रूस और यूक्रेन ने अपनी हरी झंडी दी थी और प्रधान मंत्री से कहा कि उन्हें सुरक्षित मार्ग के साथ कोई समस्या नहीं है।” सूत्रों ने कहा कि नेताओं के बीच हुए फोन पर बातचीत ने सुरक्षित निकासी के पहल को अंतिम स्वरूप दिया। वहीं मॉस्को और कीव में अधिकारियों को “मानवीय गलियारा” बनाने के निर्देश मिलने के बाद डेक को मंजूरी दे दी गई।

बता दें कि भारत का लक्ष्य जंग के हालात से भारतीयों को बाहर निकालना था। इसको लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी अपने समकक्षों और दो भारतीय राजदूतों के साथ पूरी तत्परता से लगे रहे। वहीं मास्को में पवन कपूर और कीव में पार्थ सत्पथी, दोनों दिल्ली में शीर्ष अधिकारियों के साथ संपर्क में थे। इसके अलावा जिनेवा में अंतर्राष्ट्रीय संगठन रेड क्रॉस से भी संपर्क किया गया और उन्होंने यूक्रेन में अपनी इकाई को सतर्क कर दिया, जिससे निकासी अभियान की व्यवस्थाओं में मदद मिली।

हालांकि लगातार हमलों के बीच इस बात की भी गहन आशंका थी कि युद्धविराम होगा या नहीं। वहीं सोमवार की आधी रात तक निकासी अभियान के लिए मानवीय गलियारे और सीजफायर के लिए अंतिम हरी झंडी मिलने से पहले कई फोन कॉल किए गए और संदेशों का आदान-प्रदान किया गया। यहां तक ​​​​कि छात्रों को सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए कहा गया। उन्हें कोई ट्वीट, कोई पोस्ट नहीं करने की सलाह दी गई।

बता दें कि सुमी में फंसे 700 भारतीय छात्रों को निकालने के लिए बसों का इंतजाम भी बड़ी मुश्किल से हुआ। भारतीय अधिकारियों और स्थानीय दूतावास के कर्मचारियों की तीन टीमें तीन अलग-अलग शहरों में तैनात थीं। दूतावास के अधिकारी ने कहा कि कई चुनौतियों का सामना करने के बाद अंतत: बसें सुमी तक पहुंचने में सफल रहीं।

इस दौरान ड्राइवरों को भी ढूंढना मुश्किल था। क्योंकि वाहनों को ज्यादातर यूक्रेनी सेना के कर्मियों द्वारा नियंत्रित किया गया था। इसमें कुछ निजी कारों को शामिल किया गया था। हालांकि कुछ में ईंधन की भी कमी थी। इस अभियान में स्थानीय संपर्क से मदद ली गई। अंत में, 12 बसें सुमी में एक सेंटर तक पहुंचने में सक्षम हुई। जहां से वे छात्रों को एक छात्रावास से लेकर पहुंची। इसके बाद भारतीयों को बसों के माध्यम से यूक्रेन के पोल्टावा के लिए रवाना किया गया।

एक बार कागजी कार्रवाई पूरी हो जाने के बाद छात्रों को 10 या 11 मार्च की सुबह तक कम से कम तीन विमानों से भारत वापस भेज दिया जाएगा। व्यवस्थाओं में शामिल एक अन्य अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उन्हें वहां से निकालना आसान काम नहीं था, बहुत सारी चुनौतियां थीं, लेकिन हम किसी की जान जोखिम में डाले बिना इसमें कामयाब रहे।”

वहीं इस संबंध में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सभी छात्र यूक्रेन के पोल्टोवा के लिए बस से निकले हैं। मैंने नियंत्रण कंट्रोल रूम से बात की है, बीती रात तक सुमी में 700 के करी भारतीय छात्र थे।

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