नई दिल्ली: यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के हाई-प्रोफाइल केस में अभिनव चंद्रचूड़ की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री पूरे न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। अभिनव, पूर्व CJI डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के बेटे हैं और 8 साल 6 महीने में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में किसी केस की पैरवी करते नजर आए। हालांकि, वो फिजिकली कोर्ट में मौजूद नहीं थे, बल्कि वर्चुअल तौर पर CJI कोर्ट से जुड़े और इस याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट में पहली बार पेश हुए अभिनव चंद्रचूड़
14 फरवरी की सुबह सुप्रीम कोर्ट में रोजाना की तरह सुनवाई शुरू हुई। इसी दौरान ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ विवाद केस में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया की ओर से एक वकील पेश हुए, जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। ये कोई और नहीं बल्कि बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अभिनव चंद्रचूड़ थे। खास बात यह थी कि पिछले 8 साल 6 महीने से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में किसी भी मामले की पैरवी नहीं की थी।
पिता के रिटायरमेंट के बाद ही SC में पेश हुए
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के नवंबर 2024 में रिटायर होने के बाद ही अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ना शुरू किया। सूत्रों के अनुसार, 11 नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया था। रणवीर इलाहाबादिया के हाई-प्रोफाइल केस में उनकी एंट्री के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।
CJI चंद्रचूड़ के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट नहीं आए बेटे
गौरतलब है कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर 2022 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने थे और दो साल तक इस पद पर रहे। इस दौरान उनके बेटे अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़ ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट में कोई केस नहीं लड़ा। अपने विदाई भाषण में जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया था कि उन्होंने अपने बेटों से सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए कहा था, ताकि वे उनसे मिल सकें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
पिता के नक्शेकदम पर चले अभिनव और चिंतन
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कई मौकों पर बताया कि जब उनके पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ CJI थे (1982-1985), तब उन्होंने भी भारत में किसी अदालत में कोई केस नहीं लड़ा था। उसी तरह उनके बेटे अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़ भी उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए।
अब जब पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हो चुके हैं, उनके बेटे अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ना शुरू कर दिया है। इस वजह से उनकी एंट्री सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बनी हुई है।




