अहमदाबाद में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की विस्तारित बैठक में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आत्ममंथन करते हुए एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने पार्टी की रणनीति और सामाजिक समीकरणों पर गहराई से बात की और कहा, “हम दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण में उलझ गए और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) हमारा साथ छोड़कर चला गया।” सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी को समग्र सामाजिक न्याय की दिशा में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 1991 से कांग्रेस राज्य की सत्ता से बाहर है। उन्होंने कहा, “हम मुस्लिमों की बात करते हैं, इसलिए हमें कई बार मुस्लिम परस्त कहा जाता है। लेकिन हमें इससे डरना नहीं है। मुद्दे उठाने चाहिए, न कि उनसे कतराना चाहिए।”
राहुल गांधी के इस बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस अब अपने सामाजिक गठजोड़ की समीक्षा कर रही है और उन वर्गों तक दोबारा पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिनका भरोसा पार्टी से पिछले कुछ दशकों में कमजोर हुआ है। खासकर ओबीसी वोट बैंक, जिसे भारतीय राजनीति में निर्णायक माना जाता है।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक मंगलवार को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित की गई। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि कांग्रेस अपने 140 साल के इतिहास में छठी बार गुजरात में अधिवेशन कर रही है। इस बैठक को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती से भी जोड़ा गया। कांग्रेस ने उनके सम्मान में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया।
बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि इस विस्तारित बैठक में 158 सदस्य शामिल हुए। उन्होंने कहा, “जब हम सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहे हैं, तो उनके स्मारक स्थल पर बैठक आयोजित करना हमारा कर्तव्य बनता है।”
रमेश ने यह भी कहा कि संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की अवधारणा को लेकर भी गहन चर्चा हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन कांग्रेस के न्याय योद्धाओं में नई ऊर्जा और जोश का संचार करेगा।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “महात्मा गांधी के आदर्शों और सरदार पटेल के दृढ़ निश्चय को साथ लेकर हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हर कांग्रेस कार्यकर्ता देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता है और उसे निभाने के लिए संकल्पित है।”
जयराम रमेश ने कहा कि गुजरात में इस प्रकार की बैठक आयोजित करना खुद में एक शक्तिशाली संदेश है। उन्होंने कहा, “हमारे प्रस्ताव से यह भी साफ होगा कि नेहरू और पटेल की जोड़ी किस प्रकार आधुनिक भारत की नींव रखी और गांधी जी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम लड़ा।”
कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस की नई सोच और सामाजिक गठबंधन को फिर से संवारने की कोशिश को दर्शाता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आगामी चुनावों में इस नई रणनीति को ज़मीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है।




