हाथों में हथकड़ी पहनकर भारतीयों के डिपोर्टेशन का विरोध, NCP-SCP नेता जितेंद्र आव्हाड बोले- अमेरिका में सुरक्षित नहीं भारतीय

हाथों में हथकड़ी पहनकर भारतीयों के डिपोर्टेशन का विरोध, NCP-SCP नेता जितेंद्र आव्हाड बोले- अमेरिका में सुरक्षित नहीं भारतीय

मुंबई: अमेरिका से अवैध अप्रवासी भारतीयों को हथकड़ी लगाकर भारत भेजे जाने के विरोध में महाराष्ट्र में एनसीपी-एससीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। उन्होंने खुद हथकड़ी पहनकर सड़कों पर विरोध जताया और अमेरिका में भारतीयों के साथ किए जा रहे अन्याय पर नाराजगी जाहिर की।

आव्हाड बोले- भारतीयों के साथ हो रहा अन्याय
पत्रकारों से बातचीत में जितेंद्र आव्हाड ने कहा, “अमेरिका में भारतीयों को अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें वहां से जबरन भेजा जा रहा है और हथकड़ी पहनाकर अपमानित किया जा रहा है। यह हमारे देशवासियों का अपमान है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस मुद्दे पर अमेरिका से कड़ा विरोध जताना चाहिए, लेकिन सरकार चुप बैठी है।

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों की दयनीय स्थिति
हाल ही में अमेरिका ने कई भारतीयों को अवैध अप्रवास के कारण डिपोर्ट किया। इनमें से कई लोगों को न केवल जबरन भेजा गया, बल्कि हथकड़ी लगाकर शर्मसार भी किया गया। इससे उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से अपमान का सामना करना पड़ा। आव्हाड ने कहा कि भारतीयों को अमेरिका में सुरक्षित माहौल नहीं मिल रहा और उनकी परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री ने भी जताई चिंता
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री कुलदीप धालीवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एनआरआई समुदाय से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

धालीवाल ने कहा, “हम निर्वासित भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार के मौके देंगे। पंजाब सरकार पहले ही 50,000 नौकरियां प्रदान कर चुकी है और आगे भी औद्योगिक और इस्पात क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर युवाओं को रोजगार देने की योजना बना रही है।”

सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग
इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से अमेरिकी प्रशासन के सामने इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की मांग की है। जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि भविष्य में भारतीयों के साथ ऐसा व्यवहार न हो।

विरोध प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ सकता है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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