नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के विरोध में आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हुए और उन्होंने इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। ओवैसी ने कहा कि “बीजेपी सरकार हमारी मस्जिदें छीनना चाहती है और वक्फ की संपत्तियों को नष्ट करने की योजना बना रही है।”
इस प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) द्वारा किया गया था, जिसमें कई मुस्लिम और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विपक्षी दलों के कई सांसदों को भी आमंत्रित किया गया था, हालांकि तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] जैसी भाजपा की सहयोगी पार्टियों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
ओवैसी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान ओवैसी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “1995 का वक्फ कानून अपने आप में पूर्ण था। अगर उसमें कोई कमी थी, तो सरकार को उसे दुरुस्त करना चाहिए था, न कि पूरी तरह से बदल देना चाहिए। यह सरकार वक्फ की संपत्तियों को बर्बाद करना चाहती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति को उसकी सहयोगी पार्टियां भी समर्थन दे रही हैं। यह विधेयक अगर पास हुआ, तो हम पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ेंगे।”
पहले 13 मार्च को होना था विरोध प्रदर्शन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पहले 13 मार्च को धरना देने का ऐलान किया था, लेकिन उस दिन संसद में संभावित अवकाश के कारण कार्यक्रम को 17 मार्च तक टाल दिया गया। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि “हमने जनवरी और फरवरी में तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनका सहयोग मांगा था, लेकिन वे फिलहाल सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।”
इलियास ने यह भी दावा किया कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को करीब पांच करोड़ मुसलमानों ने ई-मेल के माध्यम से अपनी राय भेजी थी, लेकिन उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
जेपीसी अध्यक्ष ने AIMPLB पर साधा निशाना
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इस विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि “एआईएमपीएलबी को पहले ही समिति के सामने बुलाया गया था और उनकी बातों को सुना भी गया। उनकी कई बातों को समिति की रिपोर्ट में शामिल भी किया गया है। इसके बावजूद वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो पूरी तरह से गैर-जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा कि “संशोधन के बाद एक बेहतर कानून बनने जा रहा है, जिससे गरीबों, महिलाओं, विधवाओं और बच्चों को भी वक्फ की संपत्तियों का लाभ मिलेगा। यह विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।”
राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी
AIMPLB के प्रवक्ता ने यह स्पष्ट कर दिया कि “अगर सरकार इस विधेयक को पारित करने की कोशिश करती है, तो हम पूरे देश में इसका विरोध करेंगे।” बोर्ड का कहना है कि “यह विधेयक वक्फ की संपत्तियों को कमजोर करने और उसे सरकारी नियंत्रण में लाने का प्रयास है।”
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस बजट सत्र के दूसरे चरण में इस विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह देशभर में बड़े विरोध-प्रदर्शनों की वजह बन सकता है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर देश में गहमागहमी तेज हो गई है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे एक सुधारात्मक कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम संगठनों और AIMIM जैसे विपक्षी दलों का कहना है कि यह वक्फ की संपत्तियों को कमजोर करने और मस्जिदों को छीनने की साजिश है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, खासकर अगर सरकार इसे संसद में पेश करने की कोशिश करती है।




