यूपी के प्राइमरी स्कूलों में पुरानी किताबों से होगी पढ़ाई, नए सत्र के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने दिए आदेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खुशखबरी थी तो वहीं अब बच्चों के लिए पुस्तकों के इंतजाम नहीं हुए है। अप्रैल माह की पहली तारीख से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना है लेकिन बच्चों को नई किताबें जल्द नहीं मिल सकेंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अब तक किताबें छपने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई हैं। इसी वजह से बच्चों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना पड़ेगा। बेसिक शिक्षा विभाग का पुस्तक वितरण में देरी होना कोई नया नहीं है, लगभग हर साल ऐसा ही होता हैं। बस फर्क इतना होता है कि हर वर्ष वजहें अलग होती है। छात्र-छात्राओं की संख्या अनुमानित और सत्र नियमित होने के बाद भी पढ़ाई कराने की तैयारियां दुरुस्त नहीं हैं। तभी जब तक नई पुस्तकें नही आ जाती तब तक बच्चों को पुरानी पुस्तकों से ही काम चलाना पड़ेगा।

विभाग का दावा दिसंबर में हुआ था टेंडर पास
राज्य में 85 लाख छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पिछले वर्ष मुहैया कराई गई थी जो बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कलों में पढ़ते थे। इस साल भी संख्या इसी के आस-पास रहने का अनुमान है। यूपी में जनवरी से विधानसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने की वजह से विभाग किताबों का प्रबंधन समय पर नहीं कर सका। अभी तक पुस्तकों की छपाई शुरु नहीं हुई है। विभाग का दावा है कि टेंडर दिसंबर में ही किया गया था लेकिन कमेटियों की बैठक में अनुमोदन की प्रक्रिया से लटक गया। प्रदेश में अब कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए करीब 12 करोड़ पुस्तकों की छपाई होने में समय लगना तय है।

शिक्षकों के लिए नहीं होगा आसान
बेसिक शिक्षा परिषद निदेशक डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सभी शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि अनिवार्य कारणों से नई पुस्तकों की छपाई में देरी हो रही है। इसलिए अंतरिम व्यवस्था के तहत किताबों का प्रबंध किया जाए। 2021-2022 में पढ़ रहे जो छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में पहुंच गए हैं उनकी किताबों को जमा कर लिया जाए ताकि सत्र शुरू होने पर नए छात्र छात्राओं को दी जा सकें। 2022-2023 के बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध हो जाने पर पुरानी पुस्तकें वापस ले ली जाएगी। लेकिन ऐसा करने में शिक्षकों को इसका प्रबंध करना आसान नहीं होगा क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे भी है जिन्होंने अपनी पुस्तकों को क्षतिग्रस्त कर दिया है।

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