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दिल्ली के मुस्तफाबाद का नाम बदलने की तैयारी, शिवपुरी या शिवविहार हो सकता है नया नाम,बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्‍ट लाएंगे प्रस्‍ताव

दिल्ली के मुस्तफाबाद का नाम बदलने की तैयारी, शिवपुरी या शिवविहार हो सकता है नया नाम,बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्‍ट लाएंगे प्रस्‍ताव

नई दिल्ली: दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके का नाम बदलने की तैयारी जोरों पर है। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मोहन सिंह बिष्ट आज प्रस्ताव पेश करेंगे। उन्होंने पहले भी कहा था कि अगर मुस्तफाबाद का नाम बदला गया था, तो अब इसे फिर से बदला जाएगा। उनके मुताबिक, यह फैसला बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है।

मुस्तफाबाद का नया नाम क्या होगा?
विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने इस मामले पर एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि नए नाम के रूप में शिवपुरी या शिवविहार को चुना जा सकता है। उन्होंने कहा, “नाम बदलने से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है? जब मैं 2008 में दूसरी सीट पर चला गया, तब इस जगह का नाम बदलकर मुस्तफाबाद कर दिया गया था। अब हम इसे फिर बदलेंगे।”

बिष्ट ने आगे कहा कि मुस्तफाबाद के नाम से टैक्सियां और गाड़ियां नहीं जातीं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने भीड़भाड़ और अव्यवस्था का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसे सुधारने के लिए बुलडोजर भी चलाए जाएंगे।

नाम बदलने पर सियासी विवाद
देशभर में शहरों, सड़कों और स्थानों के नाम बदलने पर सियासी बहस चलती रहती है। हाल ही में, भाजपा राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा के दिल्ली स्थित आवास 6 तुगलक लेन का नाम बदलकर स्वामी विवेकानंद मार्ग करने पर विवाद हुआ था। उन्होंने सोशल मीडिया पर नए घर की तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें तुगलक लेन को स्वामी विवेकानंद मार्ग के नीचे ब्रैकेट में लिखा गया था। इस कदम की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की थी।

दिल्ली में किसी जगह का नाम कैसे बदला जाता है?

दिल्ली में किसी इलाके का नाम बदलने की प्रक्रिया नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के जरिए होती है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:

  • प्रस्ताव पेश किया जाता है: नाम बदलने का प्रस्ताव पहले NDMC को भेजा जाता है।
  • समिति की समीक्षा: NDMC की 13-सदस्यीय समिति इस पर चर्चा करती है और नाम बदलने के कारणों की जांच करती है।
  • इतिहास और महत्त्व की पड़ताल: यह देखा जाता है कि नया नाम ऐतिहासिक रूप से उपयुक्त है या नहीं।
  • NDMC काउंसिल में अंतिम मंजूरी: यदि प्रस्ताव सभी स्तरों पर मंजूर हो जाता है, तो इसे NDMC काउंसिल में रखा जाता है।
  • आधिकारिक घोषणा: अंतिम मुहर लगने के बाद, इलाके को नए नाम से जाना जाता है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
मुस्तफाबाद का नाम बदलने की चर्चा के साथ ही यह मामला राजनीति का नया केंद्र बन सकता है। विपक्ष इस फैसले का विरोध कर सकता है, जबकि भाजपा इसे ऐतिहासिक और प्रशासनिक सुधार के तौर पर देख रही है। अब यह देखना होगा कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं।

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