नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनावों के काउंटडाउन के बीच बीजेपी और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अब इस सियासी लड़ाई में रामायण का प्रसंग भी शामिल हो गया है। दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीता हरण का प्रसंग सुनाया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस बयान को लेकर बीजेपी ने केजरीवाल पर तीखा हमला किया है।
अरविंद केजरीवाल पर बीजेपी का निशाना
बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल को “चुनावी हिंदू” और “अधर्मी” करार दिया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का धार्मिकता से कोई लेना-देना नहीं है और वह सिर्फ चुनावों के दौरान ही हिंदू धर्म का सहारा लेते हैं। सचदेवा ने कहा, “अधर्मी की छाप दिल्ली पर न पड़े, इसलिए मैंने उपवास रखा है।”
सीता हरण के प्रसंग पर विवाद
अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में रामायण के सीता हरण प्रसंग का जिक्र किया था, जिसके बाद बीजेपी ने इसे चुनावी फायदा उठाने की कोशिश करार दिया। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर चुनावी लाभ लेना चाहते हैं। पार्टी ने इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बताया और कहा कि जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
आम आदमी पार्टी का बचाव
इस विवाद के बीच, आम आदमी पार्टी ने अपने नेता का बचाव करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में किसी धर्म या धार्मिक ग्रंथ का अपमान नहीं किया है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल ने रामायण का जिक्र लोगों को नैतिकता और धर्म की शिक्षा देने के लिए किया था।
चुनावी माहौल में धर्म का मुद्दा
दिल्ली चुनावों में धर्म और धार्मिक ग्रंथों का जिक्र नया नहीं है, लेकिन इस बार केजरीवाल के बयान को लेकर शुरू हुई यह बहस चुनावी माहौल को और गरमा सकती है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और भी तीखी हो सकती है, जिससे चुनावी मुद्दों पर धर्म और धार्मिक प्रतीकों का असर देखने को मिल सकता है।
इस विवाद ने दिल्ली चुनावों में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए धार्मिक प्रसंगों का सहारा ले रही हैं। जनता की प्रतिक्रिया और इसका चुनावी परिणाम पर क्या असर होगा, यह देखने वाली बात होगी।




