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पटना, 28 जनवरी 2021

बिहार में 50 साल के बाद अक्षम सरकारी सेवकों को जबरन रिटायरमेंट के आदेश पर प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है। एक तरफ जहां नीतीश सरकार के इस फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है। वहीं विपक्ष समेत पुलिस एसोसिएशन ने इस फैसले पर सीधा विरोध जताया है। इस फैसले को लेकर पुलिस मेंस एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है। संघ के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार धीरज ने कहा है कि पुलिस विभाग में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा।

पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सरकार के इस फैसले को सामूहिक जनसंहार बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार सरकारी कर्मियों के ऊपर कई तरह की जिम्मेदारी होती है तो उस वक्त जबरन नौकरी से निकालना मृत्युदण्ड जैसा ही है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जब पुलिस की बहाली शारीरिक और मेडिकल टेस्ट के बाद होती है तो इस तरह के फैसले का कोई मतलब नहीं है।

वहीं एडीजी पुलिस हेड क्वार्टर जितेंद्र कुमार ने बयान देते हुए कहा कि गृह विभाग ने कमिटी का गठन किया है। आगे कमिटी द्वारा जैसे दिशा-निर्देश दिए जाएंगे वैसा आगे कार्रवाई की जाएगी। इस मामले पर विपक्ष का कहना है कि एक तरफ लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा तो दूसरी तरफ जबरदस्ती रिटायर्ड किया जाएगा। लॉ एंड ऑर्डर पर सरकार पूरी तरह से फेल है इसलिए पहले सरकार को ही रिटायर हो जाना चाहिए।

इस मामले पर राजद सांसद मनोझ झा ने कहा कि उस राज्य का तुगलकी फरमान है, जहां एक बड़ी आबादी को 40 से 45 की उम्र में एक अदद नौकरी बड़ी मुश्किल से मिलती है और हां अक्षमता अगर पैमाना है तो शासनादेश से उत्पन्न इस सरकार को ही रिटायर हो जाना चाहिए।