65 घंटे, 25 मीटिंग, 8 वर्ल्‍ड लीडर्स से मुलाकात, जानें पीएम के तीन देशों के दौरे का क्‍या है महत्‍व

65 घंटे, 25 मीटिंग, 8 वर्ल्‍ड लीडर्स से मुलाकात, जानें पीएम के तीन देशों के दौरे का क्‍या है महत्‍व

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 से 4 मई तक जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस के दौरे पर हैं। इस साल पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा ऐसे समय में हुई है जब यूरोप में एक युद्ध ने सात दशकों की वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित किया है। पीएम मोदी अगले 65 घंटों में सात देशों के आठ वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके अलावा 50 वैश्विक व्यापारिक नेताओं के साथ भी पीएम मोदी वार्ता करेंगे।

पीएम मोदी आज सुबह 6 बजे बर्लिन पहुंचे। बर्लिन में प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी की चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चांसलर स्कोल्ज़ के साथ पीएम मोदी की यह पहली मुलाकात होगी। जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे महत्वपूर्ण भागीदारों में से एक है, जिसके साथ भारत के गहरे द्विपक्षीय संबंध हैं। यूरोपीय संघ में भी जर्मनी की महत्वपूर्ण भूमिका है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में भारत शामिल था।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के निमंत्रण पर कोपेनहेगन की यात्रा करेंगे। पीएम मोदी डेनमार्क द्वारा आयोजित किए जा रहे दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। पीएम मोदी और डेनिश पीएम मेटे फ्रेडरिकसेन के बीच सितंबर 2020 में आयोजित वर्चुअल समिट के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को “हरित रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ा दिया गया था। फ्रेडरिकसन वर्ष 2021 में 9 से 11 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर थे, जो महामारी के बाद किसी विदेशी सरकार के प्रमुख की पहली यात्रा थी।

डेनमार्क के बाद पीएम मोदी फ्रांस के दौरे पर रवाना हो जाएंगे। एक कठिन चुनाव में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फिर से चुने जाने के बाद पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा की योजना बनाई गई है। भारत और फ्रांस के पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। 1998 के पोखरण परीक्षणों के बाद भारत की निंदा नहीं करने वाले कुछ पश्चिमी देशों में फ्रांस भी शामिल था। फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे का समर्थन करना जारी रखा है।

पीएम मोदी की यूरोप यात्रा से भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए मंच तैयार करने और मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जो डेढ़ दशक से चल रही है।

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