प्रयागराज महाकुंभ में पंचकोसी परिक्रमा का आगाज, जूना अखाड़े ने की शुरुआत, 5 दिन तक चलेगा तीर्थ का पूजन

प्रयागराज में जूना अखाड़े के साधु-संतों ने पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत की है। अखाड़े के अध्यक्ष हरि गिरी महाराज के नेतृत्व में गंगा पूजन के साथ परिक्रमा का आरंभ हुआ। यह परिक्रमा 20 जनवरी से शुरू होकर 24 जनवरी को समाप्त होगी। पांच दिन तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा में प्रयागराज के प्रमुख तीर्थ स्थलों का दर्शन और पूजन किया जाएगा।

पंचकोसी परिक्रमा की परंपरा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह परिक्रमा पूरे 30 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है, जिसमें तीर्थयात्री गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम सहित अन्य पवित्र स्थानों का भ्रमण करेंगे। इस परिक्रमा में जूना अखाड़े के नागा संन्यासी, मंडलेश्वर और महामंडलेश्वर सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा शामिल हो रहे हैं।

हरि गिरी महाराज ने परिक्रमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचकोसी परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और समाज के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज के पवित्र तीर्थों का दर्शन और पूजन करने से श्रद्धालुओं को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्राप्त होता है।

इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह भक्तों और तीर्थयात्रियों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 24 जनवरी को परिक्रमा का समापन एक भव्य भंडारे के साथ किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।

पंचकोसी परिक्रमा के पहले दिन साधु-संतों ने गंगा पूजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। हरि गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखें और गंगा को प्रदूषित होने से बचाएं।

इस परिक्रमा में शामिल होने के लिए न केवल भारत के विभिन्न हिस्सों से, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। परिक्रमा के दौरान प्रयागराज का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। हर ओर भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं, जिससे माहौल में आध्यात्मिकता का संचार हो रहा है।

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