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लखनऊ, 6 सितम्बर 2021

यूपी में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई योजनाओं का असर अब दिखने लगा है। सूबे में फुटवियर, लेदर, टेक्सटाइल और ग्लासवेयर कारोबारियों के बनाए उत्पादों की विदेशों में खूब मांग हो रही थी। इसका लाभ उठाते हुए प्रदेश के लेदर, टेक्सटाइल, ग्लासवेयर, आयरन, स्टील, एल्युमिनियम, खिलौने और कालीन कारोबारियों ने अपने उत्पादों को विदेशों में भेजकर निर्यात का ग्राफ ऊपर उठाया हैं। निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर मुख्यमंत्री योगी से मिले प्रोत्साहन के चलते ऐसे निर्यातकों के कारण ही इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल एवं मई में राज्य से 21,500.85 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 152.67 फीसदी अधिक है। निर्यात में हुए इस इजाफे के सिलसिले को बरकरार रखने तथा यूपी से देश और विदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अब प्रदेश सरकार ने हर जिले में ओवरसीज ट्रेड प्रमोशन और फैसिलिटेशन सेंटर बनाने का फैसला किया हैं। सभी जिलों में बनने वाले इन केंद्रों में समन्वय के लिए एक सेंट्रलाइज्ड फैसिलिटेशन सेंटर भी बनाए जाने की योजना एमएसएमई विभाग ने तैयार की है। सरकार को उम्मीद है कि इन सेंटर्स के बनने से निर्यात में 400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं लगभग 4000 लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया होंगे। निर्यात से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यूपी में बने तमाम उत्पादों की विदेशों में लगातार मांग बढ़ रही है। इस वजह से ही बीते वर्ष के मुकाबले 152.67 प्रतिशत अधिक निर्यात उत्तर प्रदेश से हुआ है। इसके चलते ही निर्यात वृद्धि के मामले में तमिलनाडु और गुजरात के बाद राज्य का स्थान है, जबकि देश के प्रमुख निर्यात राज्यों में यूपी छठे स्थान पर है। निर्यात के मामले में गुजरात पहले स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, आंध्र प्रदेश चैथे, कर्नाटका पांचवें स्थान पर हैं। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से हुए निर्यात के जारी किये गए नवीनतम आंकड़ों में यह खुलासा किया गया है।

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अप्रैल -मई में उत्तर प्रदेश से 21,500.85 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया गया। बीते वर्ष अप्रैल-मई में 8511.34 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया गया था। इस वर्ष कालीन, दरी, टेक्सटाइल फैब्रिक, ओवन फैब्रिक, मैन्मेद स्टेपल फैब्रिक, फुटवियर, ग्लासवेयर, आयरन, स्टील, एल्युमिनियम, चावल, प्लास्टिक उत्पाद, सिल्क, कृत्रिम फूल जैसे सामानों का के विदेशों से खूब निर्यात किया गया। नेपाल, बंगालदेश और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों ने कोरोना काल के दौरान यूपी से बड़ी संख्या ओडीओपी उत्पाद मंगवाए।

अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल-मई में 742.47 करोड़ रुपए के फुटवियर का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 147.04 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। इसी प्रकार इस वर्ष अप्रैल-मई में 310.77 करोड़ रुपए के ग्लासवेयर का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 39.99 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। इसी प्रकार इस वर्ष 120.83 करोड़ रुपए के खिलौनों का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 26.19 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। इसी प्रकार इस वर्ष 744.15 करोड़ रुपए के कालीन और टेक्सटाइल फैब्रिक का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 247.63 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। लेदर से बने पर्स, ब्लेट, बैग तथा अन्य उत्पादों का निर्यात इस वर्ष 493.80 करोड़ रुपए का हुआ, जबकि बीते वर्ष 79.21 करोड़ रुपए के ही लेदर से बने उत्पादों का निर्यात हुआ था।

ओवरसीज ट्रेड प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन सेन्टर्स से प्रदेश के 25 निर्यात बाहुल्य जिलों से निर्यात में 250 करोड़ की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 2500 की संख्या में रोजगार मिलेगा। इसी तरह 25 अपेक्षाकृत कम निर्यात वाले जिलों में निर्यात में 125 करोड़ की बढ़ोतरी और 1250 लोगों को रोजगार मिलेगा। बचे जिलों से 25 करोड़ के निर्यात में वृद्धि और 250 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनके कदम उठा रही है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार उद्यमियों को कई तरह की रियायतें भी दे रही है। ताकि राज्य के तमाम उत्पादों को विदेशों में आसानी से भेजा जा सके।