बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राष्ट्रगान के अपमान का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में मुजफ्फरपुर की एसीजेएम पश्चिमी कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिवक्ता सूरज कुमार द्वारा दायर किए गए इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 298, 352 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम की धारा 2 और 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि 20 मार्च को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगान के दौरान अनुचित व्यवहार किया, जिससे पूरे राज्य में विवाद खड़ा हो गया है।
नीतीश कुमार पर क्या हैं आरोप?
20 मार्च को सेपकटरा विश्वकप खेल के उद्घाटन समारोह के दौरान राष्ट्रगान के समय नीतीश कुमार ने कथित रूप से मुख्य सचिव से बातचीत जारी रखी और जब सचिव ने उन्हें ऐसा करने से रोका, तो उन्होंने उनके हस्तक्षेप को नजरअंदाज कर दिया। इसके अलावा, आरोप है कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगान के दौरान हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन भी किया, जबकि अन्य सभी लोग सावधान की मुद्रा में थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, तेजस्वी ने की माफी की मांग
मुख्यमंत्री के इस व्यवहार पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बिहार के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगान का अपमान किया है। एक बिहारी होने के नाते मुझे शर्म आती है। यह भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा आचरण किया हो। मुख्यमंत्री को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें अब रिटायर हो जाना चाहिए।”
तेजस्वी यादव ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और लिखा, “आप कुछ सेकंड के लिए भी मानसिक और शारीरिक रूप से स्थिर नहीं रह सकते। इस स्थिति में आपका मुख्यमंत्री बने रहना राज्य के लिए चिंता का विषय है।”
विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा
राष्ट्रगान अपमान मामले को लेकर बिहार विधानसभा और विधान परिषद में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। राजद विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और सदन के भीतर उनके इस्तीफे की मांग की। अध्यक्ष नंद किशोर यादव की चेतावनी के बावजूद विपक्षी विधायकों ने हंगामा जारी रखा, जिससे सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है और सरकार से जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा, “यह कोई छोटी बात नहीं है। राष्ट्रगान का सम्मान करना हर भारतीय का कर्तव्य है, लेकिन मुख्यमंत्री खुद ही इसका उल्लंघन कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
नीतीश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं
इस मामले पर अब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, जनता दल (यूनाइटेड) के कुछ नेताओं ने इसे विपक्ष की साजिश करार दिया है और कहा है कि मुख्यमंत्री का इरादा राष्ट्रगान का अपमान करने का नहीं था।
अदालत में अगली सुनवाई 28 मार्च को
इस मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च को मुजफ्फरपुर की एसीजेएम पश्चिमी कोर्ट में होगी। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत नीतीश कुमार को अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है और बिहार में सियासी माहौल गर्म हो गया है।
बिहार की राजनीति में नया विवाद
इस घटना ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे नैतिकता से जोड़कर देख रहा है और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल इस मामले को ज्यादा तूल न देने की अपील कर रहा है।
अब देखना यह होगा कि 28 मार्च को अदालत में क्या होता है और इस मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या रुख अपनाते हैं।




