यूपी चुनाव में अहम बना निषाद आरक्षण, एससी के दर्जा को ले मुकेश सहनी ने योगी आदित्‍यनाथ को चेताया

यूपी चुनाव में अहम बना निषाद आरक्षण, एससी के दर्जा को ले मुकेश सहनी ने योगी आदित्‍यनाथ को चेताया

पटना, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) में विकासशील इनसान पार्टी (VIP) ने निषादों को अनुसूचित जाति आरक्षण (SC Reservation to Nishad) का कार्ड खेला है। उधर, यूपी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी निषाद पार्टी (Nishad Party) के अध्यक्ष संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने भी इसके लिए राज्‍य की योगी आदित्‍यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) पर दबाव बनाते हुए दो-टूक कहा है कि आरक्षण नहीं तो बीजेपी को समर्थन भी नहीं। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी निषाद आरक्षण का समर्थन किया है। बिहार बीजेपी के उपाध्‍यक्ष व सासंद अजय निषाद (Ajay Nishad) ने मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) को यूपी चुनाव से हटने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। इसका जवाब देते हुए ‘वीआइपी’ ने कहा है कि अजय निषाद अगर योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) से बोलकर यूपी में निषाद आरक्षण लागू  करा दें तो बिहार व यूपी का निषाद  समाज योगी  की  जय  करेगा, अन्‍यथा उन्‍हें निषाद समाज कभी माफ नहीं करेगा।

यूपी के कई इलाकों में निर्णायक हैसियत रखते निषाद

विदित हो कि उत्तर प्रदेश में निषाद समाज करीब पांच प्रतिशत है। वे मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, निषाद, कश्यप के उपनाम से जाने जाते हैं। वे यूपी के कई इलाकों में सियासी समीकरण उलट-पुलट करने की ताकत रखते हैं। खासकर गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, संतकबीर नगर, मिर्जापुर, भदोही, इलाहाबाद, वाराणसी, जौनपुर, फतेहपुर, हमीरपुर और सहारनपुर जिलों में निषाद वोटरों की बड़ी तादाद है। इस वोट बैंक की ताकत को ध्‍यान में रखते हुए बीजेपी ने निषाद पार्टी के साथ गठबंधन किया है, लेकिन पार्टी ने निषाद समाज के आरक्षण की मांग उठाई है। बिहार सरकार में मंत्री मुकेश सहनी भी इस वोट बैंक के सहारे यूपी के चुनाव मैदान में हैं। उन्‍होंने यूपी में निषादों को एससी आरक्षण देने की मांग की है।

बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष को वीआइपी की चेतावनी

बीजेपी के बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष और मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद ने बिहार की मुकेश सहनी को चेतावनी दी है कि यदि वे यूपी चुनाव में उतरने की ज‍िद से पीछे नहीं हटे तो उन्‍हें परिणाम भुगतने होंगे। इसपर ‘वीआइपी’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति (Deo Jyoti) ने बीजेपी सांसद अजय निषाद को कहा है कि वे योगी आदित्‍यनाथ से कहकर अगर यूपी में निषादों के लिए एससी आरक्षण लागू करा दें तो बिहार व यूपी के निषाद भाई-बहन योगी आदित्‍यनाथ जी की जय करेंगे। अजय निषाद को नसीहत देते हुए कहा कि वे खुद निषाद जाति के होकर भी निषाद आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, निषाद समाज उन्‍हें कभी माफ नहीं करेगा। निषाद आरक्षण का विरोध करना कहीं भारी न पड़ जाए।

आरक्षण को लेकर बीजेपी को निषाद पार्टी की दो-टूक

निषादों को आरक्षण देने की मांग नई नहीं है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले निषाद समाज को एससी में शामिल कराने की मांग नए सिरे से उठी है। बीते 17 दिसंबर को लखनऊ में हुई निषाद समाज की रैली में रैली में आरक्षण की घोषणा की उम्‍मीद की जा रही थी। ऐसा नहीं होने से बीजेपी के सहयोगी निषाद पार्टी के अध्‍यक्ष संजय निषाद नाराज हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर उन्‍होंने कहा है कि गृहमंत्री अमित शाह को निषाद आरक्षण के मुद्दे पर कुछ कहना चाहिए था। अगर 2022 में बीजेपी को सरकार बनानी है तो उसे निषाद समाज का ध्‍यान रखना होगा। केवल यह कहने से काम नहीं चलेगा कि सरकार बनने पर निषाद समाज के मसले को हल किया जाएगा।

बिहार में पीछे हट चुकी तो यूपी में खामोश है बीजेपी

यूपी, बिहार और झारखंड में निषाद समाज ओबीसी की श्रेणी में आते हैं। जबकि, दिल्ली और दूसरे राज्यों में इन्‍हें अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है। बिहार ने निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने से इनकार कर दिया है, लेकिन यूपी में इसकी मांग की जा रही है। बीजेपी के लिए समस्‍या यह है कि निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने से पहले से शामिल दलित जातियाें को मिलने वाला लाभ बंटेगा, जिससे वे नाराज हो सकते हैं। दलित समुदाय की अन्‍य जातियों को भी बीजेपी नाराज नहीं कर सकती है। इसी कारण केंद्र व राज्‍य की सरकारें बिहार में इससे पीछे हट चुकी है और अब यूपी में भी खामोश है।

निषाद पार्टी के साथ मुकेश सहनी का भी दबाव

बीजेपी के लिए मुूश्किल यह है कि वह निषाद समाज को साथ लेकर चलना चाहती है। ऐसे में संजय निषाद के साथ बीजेपी नेताओं की बैठकों का दौर जारी है। संजय निषाद विधानसभा चुनाव से पहले निषाद आरक्षण की घोषणा चाहते हैं। समाजवादी पार्टी के जातीय समीकरण तथा मुकेश सहनी की यूपी चुनाव में एंट्री को देखते हुए बीजेपी निषाद समाज की मांग को लेकर दबाव में दिख रही है।

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