नई दिल्ली, युवाजना श्रमिक रैतु कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता और संसदीय दल के प्रमुख वी विजयसाई रेड्डी ने 26 जनवरी 2025 को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अपना इस्तीफा सौंपा। YSRCP के एक और नेता के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में NDA की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
NDA को कैसे मिलेगी बढ़त?
इससे पहले दिसंबर 2024 में राज्यसभा में 3 इस्तीफों के चलते NDA सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को 2 सीटें मिली थीं। 2019 में विधानसभा चुनाव में हार के बाद TDP की ताकत खत्म हो गई थी, लेकिन NDA के समर्थन से उसे दोबारा मजबूती मिली। वर्तमान में भाजपा के पास राज्यसभा में 98 सांसद हैं। NDA के पास 2 निर्दलीय और 6 नामित सदस्यों के समर्थन के साथ बहुमत पहले ही है, लेकिन अब एक अतिरिक्त सीट मिलने से इसका प्रभाव और बढ़ जाएगा।
नामित सदस्यों के जरिए NDA को फायदा
- केंद्र सरकार के पास अभी 4 नामित सदस्यों की नियुक्ति का विकल्प है।
- राज्यसभा में 12 नामित सदस्यों का प्रावधान है, जिनमें से 8 सीटें फिलहाल भरी हुई हैं।
- नामित सदस्य आमतौर पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं, जिससे NDA को विधायी शक्ति मिलेगी।
जल्द होंगी कई सीटें खाली
- जून 2025 में असम से 2 राज्यसभा सदस्य रिटायर होंगे, जिनमें से एक भाजपा और एक असम गण परिषद (AGP) से हैं।
- जुलाई 2025 में तमिलनाडु से 6 सदस्य रिटायर होंगे, जिनमें DMK के 3, AIADMK, PMK और MDMK के 1-1 सदस्य शामिल हैं।
- भाजपा असम में अपनी सीट बरकरार रख सकती है, जबकि DMK उपचुनाव के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी।
क्या बदलेगा राज्यसभा का गणित?
YSRCP नेता के इस्तीफे के बाद NDA की स्थिति और बेहतर हो सकती है। यदि भाजपा, TDP या जन सेना पार्टी को यह सीट मिलती है, तो राज्यसभा में NDA की पकड़ और मजबूत हो जाएगी। साथ ही, नामित सदस्यों की नियुक्ति से भी NDA को विधायी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।




