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मुख्य सचिवों का सम्मेलन: महिला सशक्तिरण, हेल्थ-न्यूट्रिशन जैसे मुद्दों पर PM मोदी रखेंगे अपनी बात

मुख्य सचिवों का सम्मेलन: महिला सशक्तिरण, हेल्थ-न्यूट्रिशन जैसे मुद्दों पर PM मोदी रखेंगे अपनी बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6-7 जनवरी को दिल्ली में मुख्य सचिवों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझेदारी में गति लाने के लिए यह एक और पहल की जा रही है। मुख्य सचिवों का इस तरह का पहला सम्मेलन जून 2022 को धर्मशाला में आयोजित किया गया था।

जानिए पूरी डिटेल्स..
इस वर्ष मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 5 से सात जनवरी को नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का केंद्रीय विषय राज्यों की साझेदारी के साथ तेज और सतत आर्थिक विकास हासिल करना है। सम्मेलन में केंद्र सरकार, मुख्य सचिव और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और विषयगत विशेषज्ञों को मिलाकर 200 से अधिक लोग हिस्सा लेंगे। सम्मेलन विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सहयोगात्मक कार्यवाही की भूमिका तैयार करेगा, जिसमें रोजगार सृजन तथा समावेशी मानव विकास की वृद्धि पर जोर दिया जाएगा।

सम्मेलन का एजेंडा पिछले तीन महीनों में मुख्य मंत्रालयों, नीति आयोग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विषयगत विशेषज्ञों के साथ 150 से अधिक प्रत्यक्ष व वर्चुअल बैठकों में गहन चर्चा के बाद निर्धारित किया गया है।

सम्मेलन के दौरान चर्चा के लिए 6 विषयों को चिह्नित किया गया है, जैसे 1) एमएसएमई को गति देना, 2) अवसंचरना और निवेश, 3) अनुपालन को न्यूनतम करना, 4) महिलाओं का सशक्तिकरण, 5) स्वास्थ्य व पोषण, 6) कौशल विकास।

तीन विशेष सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा, जैसे- विकसित भारतः अंतिम पड़ाव तक पहुंचना, वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के पांच वर्ष –सीख और अनुभव, और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां और भारत की प्रतिक्रिया।

इनके अलावा चार विषयों पर भी चर्चा की जाएगी, जैसे-वोकल फॉर लोकल, अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष, जी-20: राज्यों की भूमिका, और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीजस।

हर विषय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उत्कृष्ट व्यवहारों को भी प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि वे एक-दूसरे से सीख सकें।

प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य सम्मेलन के पहले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तीन वर्चुअल सम्मेलन भी किए गए थे, जिनके विषय थे-विकास का आधार जिले, चक्रिय अर्थव्यवस्था, आदर्श केंद्र शासित प्रदेश। इन वर्चुअल सम्मेलनों के नतीजों को मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।

सहकारी संघवाद के नए युग की शुरुआत( new era of Cooperative Federalism)
मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन राज्यों के साथ साझेदारी में तेजी से और निरंतर आर्थिक विकास हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह कोई अकेला उदाहरण नहीं है, जब पीएम मोदी ने भारत की कई जटिल चुनौतियों का जवाब देने के लिए दक्षता और तालमेल लाने के लिए सहकारी संघवाद का लाभ उठाने की कोशिश की है। पिछले 8 वर्षों में पीएम मोदी ने नीति निर्माण और कार्यान्वयन की प्रक्रिया को अधिक सहयोगात्मक और परामर्शात्मक बनाने के लिए काम किया है।

एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम में केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं
सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के सम्मिलन के माध्यम से देश भर के सबसे पिछड़े जिलों के परिवर्तन में तेजी लाने के उद्देश्य से पीएम मोदी द्वारा जनवरी 2018 में एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम शुरू किया गया था।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में एक राज्य को संचालित करने का व्यापक अनुभव होने के बाद पीएम मोदी जानते हैं कि पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता राज्यों के विकास की कुंजी है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने टैक्स के विभाज्य पूल( divisible pool of taxes) में राज्यों की हिस्सेदारी को 32% से बढ़ाकर 42% करने का निर्णय लिया। इसने राज्यों को उनकी आवश्यकता और आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रमों को डिजाइन और कार्यान्वित करने के लिए अधिक संसाधन प्रदान किए हैं।

जीएसटी परिषद और राजकोषीय संघवाद(GST council and Fiscal Federalism)
GST परिषद एक संयुक्त मंच है, जहां GST से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने में केंद्र और राज्य दोनों भागीदार होते हैं। परिषद की कार्यप्रणाली सर्वसम्मति से निर्णय लेने पर निर्भरता के साथ राजकोषीय संघवाद का एक उदाहरण है।

प्रगति: पीएम मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों को शामिल करते हुए प्रो-एक्टिव गवर्नेंस और समय पर कार्यान्वयन के लिए आईसीटी आधारित मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की अनूठी अवधारणा की शुरुआत की है। अनूठी पहल केंद्र सरकार (सचिव), राज्य सरकार (मुख्य सचिव) और अन्य अधिकारियों को पीएम के साथ एक टेबल पर लाती है।

डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन
प्रधानमंत्री हर साल डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन में शामिल होते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह नियमित हो गया था और ऐसे सम्मेलनों में प्रधान मंत्री ज्यादातर सांकेतिक उपस्थिति रखते थे। हालांकि, 2014 से पीएम मोदी ने सम्मेलन में गहरी दिलचस्पी ली है। वह सम्मेलन के सभी सत्रों में भाग लेने का प्रयास करते हैं और शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ स्वतंत्र और अनौपचारिक चर्चा को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि ये बैठकें दिल्ली से बाहर हों और राज्यों में हों। इससे राज्य के पुलिस प्रमुखों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने और देश के सामने मौजूद प्रमुख कानून और व्यवस्था के मुद्दों का समाधान खोजने की दिशा में एक साथ काम करने के लिए एक अनुकूल वातावरण विकसित करने में मदद मिली है।

राज्यों के गृह मंत्रियों का ‘चिंतन शिविर’
पीएम मोदी ने अक्टूबर 2022 में राज्यों के गृह मंत्रियों के ‘चिंतन शिविर’ को संबोधित किया, जहां पीएम ने कहा  कि चिंतन शिविर सहकारी संघवाद का एक प्रमुख उदाहरण है।

सभी राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों का राष्ट्रीय सम्मेलन
सितंबर, 2022 में पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के एकता नगर में पर्यावरण मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया था। सम्मेलन ने सहकारी संघवाद की भावना को आगे बढ़ाया और पर्यावरण के मुद्दों पर बेहतर नीतियां बनाने में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच और तालमेल बनाया।

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