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नई दिल्ली, 26 मार्च 2021

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के विधानसभा चुनाव में एक दिन का भी समय नहीं बचा है। राज्य में कल तीस सीटों पर मदतान होना है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंदीग्राम के इलेक्शन एजेंट ने एसके सूफियान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सूफियान अपने खिलाफ फिर से एफआईआई को दायर करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। दरअसल कोलकाता हाई कोर्ट ने एफआईआर को फिर से लागू कर दिया था।

एक चुनाव एजेंट राजनीतिक उम्मीदवार के अभियान को चलाने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार व्यक्ति है। कुछ मामलों में, उम्मीदवार खुद भी चुनाव एजेंट हो सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के चुनाव एजेंट एसके सूफियान का नाम 2007-09 में नंदीग्राम हिंसा से संबंधित एफआईआर में शामिल था। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2020 में एफआईआर वापस ले ली गई,इस संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक हालिया आदेश के बाद उसे पुनर्जीवित किया गया है।

एसके सूफियान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ से कहा कि एफआईआर में उनके मुवक्किल की जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक चुनाव एजेंट के रूप में कार्यों का निर्वहन करने की क्षमता रोकती है। इसलिए इस मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में कुछ भी हो सकता है. हम इसे छुट्टियों के बाद सोमवार को सुन सकते हैं।

इस पर वकील ने कहा कि नंदीग्राम में 1 अप्रैल को चुनाव होने हैं। जवाब में सीजेआई ने कहा, मैं देखूंगा… हम आपको छुट्टियों में एक स्पेशल बेंच दे सकते हैं। वहीं मामले पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी को बेदाग चुनाव एजेंट तक नहीं मिले। उन्होंने ट्वीट किया था, नंदीग्राम सीट पर उनके एजेंट सूफियान और अबू ताहेर के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वारंट लंबित है। मुख्य सचिव ने स्थानीय आयुक्त को SLP दायर करने का आदेश दिया है। यह आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।