जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव समेत 41 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामला ट्रायल की ओर बढ़ गया है।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
आरोप है कि साल 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे, उस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन कथित तौर पर लालू यादव के परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम ट्रांसफर कराई गई।
कब और कैसे शुरू हुआ विवाद
रेलवे के पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर जोन में हुई ग्रुप-डी भर्तियों को लेकर सबसे पहले शिकायतें सामने आईं। आरोप लगाया गया कि नौकरी देने के बदले जमीन बेहद कम कीमत पर ली गई और बाद में उसे परिवार या करीबी लोगों के नाम कर दिया गया।
CBI की जांच और FIR
मामले में गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। मई 2022 में CBI ने FIR दर्ज की और लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान एजेंसी को जमीन की रजिस्ट्री, बैंक लेन-देन और कंपनियों से जुड़े अहम दस्तावेज मिले।
चार्जशीट में क्या आरोप लगाए गए
CBI ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया कि रेलवे की नौकरियों के बदले जमीन लेकर उसे लालू परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम कराया गया। एजेंसी के मुताबिक यह पूरा मामला आपराधिक साजिश के तहत अंजाम दिया गया। चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों के नाम थे, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है, जबकि 52 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया गया।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। कोर्ट ने माना कि आरोप है कि लालू यादव ने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए अचल संपत्ति जुटाई और अन्य आरोपियों ने इस साजिश में सहयोग किया। इसी आधार पर कोर्ट ने 41 आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया।
किन-किन पर आरोप तय
इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, रेलवे के पूर्व अधिकारी और कथित बिचौलियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। हालांकि सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
अब आगे क्या होगा
आरोप तय होने के बाद अब इस केस में नियमित ट्रायल शुरू होगा। CBI कोर्ट के सामने गवाहों और दस्तावेजी सबूत पेश करेगी। ट्रायल के बाद ही यह साफ होगा कि आरोप सिद्ध होते हैं या आरोपियों को राहत मिलती है।
क्यों अहम है यह मामला
यह केस सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता, सत्ता के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है। लालू यादव पहले से ही चारा घोटाले में दोषी ठहराए जा चुके हैं, ऐसे में लैंड फॉर जॉब मामला उनके लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों ही लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।




