कोलकाता। बंगाल में आसनसोल लोकसभा और बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर फिर बगावत तेज हो गई है। चुनाव नतीजे के अगले दिन मुर्शिदाबाद से भाजपा विधायक गौरी शंकर घोष समेत तीन नेताओं के पार्टी की राज्य कमेटी से इस्तीफा देने के बाद नदिया जिले के 10 नेताओं ने जिला कमेटी से इस्तीफा दे दिया है।
दरअसल बंगाल में एक लोकसभा व एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसे लेकर प्रदेश भाजपा में व्याप्त अंदरूनी कलह उभरकर सामने आ गया है। भाजपा के कुछ नेता प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी पर सवाल उठा रहे हैं।
नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर जिला स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों के चयन में उनकी अवहेलना करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे लोग सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के अत्याचार के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं, लेकिन पार्टी में उन लोगों की सिफारिशों की अवहेलना की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में उन लोगों को महत्व व पद दिया जा रहा है, जिनका पार्टी की लड़ाई से कोई सरोकार नहीं है।
बता दें कि इससे पहले विष्णुपुर से पार्टी सांसद सौमित्र खां ने भी चुनाव नतीजे आने के कुछ घंटे बाद शनिवार को ही प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह के परिणाम की पहले से उम्मीद थी, ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदेश इकाई का नेतृत्व अनुभवहीन नेता कर रहे हैं, जो राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि भाजपा को चुनाव लड़ने और जीत हासिल करने के लिए तृणमूल कांग्रेस से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
बता दें कि बंगाल में एक लोकसभा व एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। आसनसोल में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा ने तीन लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की और भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पाल दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं बालीगंज में भी भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा और तीसरे स्थान पर रही उसकी उम्मीदवार केया घोष की जमानत तक जब्त हो गई। इसे लेकर प्रदेश भाजपा में व्याप्त अंदरूनी कलह उभरकर सामने आ गया है।




